कांग्रेस नेता महेश जोशी गुरुवार दोपहर 1 बजे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मुख्यालय पहुंचे। वे अपने निजी सहायक के साथ ईडी कार्यालय आए, जहां उनसे जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले के सिलसिले में पूछताछ की जा रही थी। लंबी पूछताछ के बाद ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि ईडी के द्वारा पहले भी कई बार समन भेजे गए थे, लेकिन वे व्यक्तिगत कारणों से पेश नहीं हो रहे थे। ।
फर्जी प्रमाण पत्र से हासिल किए करोड़ों के टेंडर
जल जीवन मिशन घोटाला केंद्र सरकार की ‘हर घर नल’ योजना से जुड़ा है। वर्ष 2021 में श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी और मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी के ठेकेदार पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर जलदाय विभाग (PHED) से करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल किए थे। श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी ने 68 निविदाओं में भाग लिया, जिनमें से 31 टेंडर में एल-1 बोलीदाता बनकर 859.2 करोड़ रुपये के टेंडर प्राप्त किए। वहीं, श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी ने 169 निविदाओं में हिस्सा लिया और 73 में एल-1 बनकर 120.25 करोड़ रुपये के टेंडर हासिल किए।
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एसीबी, ईडी और अब सीबीआई की जांच
घोटाले का खुलासा होने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जांच शुरू की और कई अधिकारियों को हिरासत में लिया। इसके बाद ईडी ने मामला दर्ज कर महेश जोशी और उनके सहयोगी संजय बड़ाया समेत अन्य के ठिकानों पर छापेमारी की। बाद में, सीबीआई ने 3 मई 2024 को इस मामले में केस दर्ज किया। ईडी ने अपनी जांच पूरी कर 4 मई को सभी सबूत एसीबी को सौंप दिए थे।
शिकायतों और कार्रवाई का क्रमवार सिलसिला
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16 फरवरी 2023: उत्तर प्रदेश निवासी पदम सिंह ने नौ अधिकारियों के खिलाफ फर्जी टेंडर जारी करने की शिकायत ईमेल के माध्यम से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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16 मार्च 2023: वकील मनेश कुमार कलवानिया ने भी इसी मामले में शिकायत दर्ज कराई, परंतु उसका भी कोई परिणाम नहीं निकला।
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मई 2023: वित्तीय समिति की बैठक में आरोपों की जानकारी होने के बावजूद संबंधित टेंडर पास कर दिए गए।
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7 अगस्त 2023: एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने कार्रवाई करते हुए पीएचईडी इंजीनियर मायालाल सैनी, ठेकेदार पदमचंद जैन, सुपरवाइजर मलकेत सिंह और दलाल प्रवीण कुमार को गिरफ्तार किया।
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सितंबर 2023: एसीबी ने श्याम ट्यूबवेल और गणपति ट्यूबवेल कंपनियों के खिलाफ फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर टेंडर प्राप्त करने के मामले में एफआईआर दर्ज की।
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सितंबर 2023: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मामले में जांच शुरू कर दी और छापेमारी की।
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3 मई 2024: केंद्र सरकार की अनुमति मिलने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने मामला दर्ज किया।
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4 मई 2024: ईडी ने अपनी जांच पूरी कर साक्ष्य और दस्तावेज एसीबी को सौंप दिए।
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30 अक्टूबर 2024: एसीबी ने पूर्व मंत्री महेश जोशी सहित 22 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
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24 अप्रैल 2025: पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार किया गया।