जैसलमेर में रूपाराम और सालेह मोहम्मद।
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एक तरफ कर्नाटक की जीत ने पूरे देश की कांग्रेस को संजीवनी दे दी हैं। पिछले एक दशक से कांग्रेस में इस तरह की खुशखबरी कम ही देखने को मिली हैं। दूसरी तरफ जैसलमेर में कर्नाटक की जीत की खुशी में मनाए गए जश्न में कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद व विधायक रूपाराम के बीच चल रही गुटबाजी खुलकर सतह पर आ गई हैं।
2019 के नगर परिषद चुनाव से शुरू हुआ था घमासान
ये गुटबाजी आज से नहीं बल्कि साढ़े तीन साल पहले हुए नगर परिषद चुनावों से शुरू हुई जो अब चरम पर है। चुनाव नतीजों में कांग्रेस के 21, भाजपा के 20 तथा 4 निर्दलीय जीतकर आए थे। मंत्री गुट ने निर्दलीय हरिवल्लभ कल्ला का समर्थन कर उन्हें जीत दिलाई और कांग्रेस के बोर्ड का गठन किया था।
पंचायती राज चुनाव में भुगत चुके हैं खामियाजा
गुटबाजी के बाद हुए जिला परिषद चुनाव में बहुमत के बावजूद कांग्रेस ने अपने 20 साल पुराने गढ़ को बीजेपी को सुपुर्द कर दिया था। 17 सदस्यीय बोर्ड में कांग्रेस नौ सदस्यों के साथ बहुमत में थी जिसमें पांच मंत्री तथा चार विधायक गुट के थे। चर्चा है कि विधायक गुट के चारों सदस्यों के बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर हारी हुई बीजेपी के सिर जिला प्रमुख का ताज रख दिया।
शहर में अलग-अलग जगहों पर मनाया जश्न
शनिवार को आए कर्नाटक चुनावों के नतीजों के बाद जैसलमेर शहर में दो अलग-अलग जगह पर जश्न मनाया गया। कैबिनेट मंत्री के भाई व पूर्व प्रधान अमरुद्दीन फकीर के नेतृत्व में शाम छह बजे कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने एयरफोर्स सर्किल पर पटाखे फोड़कर जश्न मनाया तो कुछ देर बाद विधायक की बेटी व पूर्व जिला प्रमुख अंजना मेघवाल व कांग्रेस जिलाध्यक्ष उम्मेद सिंह तंवर के नेतृत्व में हनुमान चौराहे पर कांग्रेसियों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा किया।
सतह पर है गुटबाजी फिर भी इनकार
गुटबाजी के सवाल का जवाब देते हुए जिलाध्यक्ष उम्मेद सिंह तंवर ने कहा कि ये ऐतिहासिक जीत है और जीत का जश्न कार्यकर्ता कहीं भी मना सकते हैं। उन्होंने ग्रामीण इलाकों का हवाला दिया। एक ही शहर में कुछ समय के अंतराल में अलग अलग जश्न मनाना शहर में चर्चाओं को आग दे रहे हैं।
सार्वजनिक कार्यक्रमों में नहीं शामिल होते एक-दूसरे गुट के कार्यकर्ता
पिछले लंबे अरसे से मंत्री के कार्यक्रम में विधायक गुट के कार्यकर्ता शामिल नहीं होते, तो विधायक गुट के कार्यक्रम में मंत्री गुट के कार्यकर्ता नदारद रहते हैं। ऐसे में आम कांग्रेस कार्यकर्ताओ के सामने ये मुसीबत हो जाती है कि वह किस कार्यक्रम में जाए और किसमें नहीं। सूबे में विधानसभा चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। ऐसे में कर्नाटक नतीजो से गदगद कांग्रेस को इस गुटबाजी से जैसलमेर जिले की दोनों विधानसभा क्षेत्रों में नुकसान उठाना पड़ सकता हैं।