राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के नतीजे घोषित हुए अभी तीन दिन ही हुए हैं, लेकिन शहरों की सियासत में चुनाव का दूसरा दौर शुरू हो चुका है। अब मुकाबला वार्ड जीतने का नहीं, बोर्ड बनाने के लिए जरूरी संख्या जुटाने और उसे मतदान तक अपने खेमे में बनाए रखने का है। इसके लिए सभी पैंतरे आजमाए जा रहे हैं। एक दूसरे के खेमों में सेंधमारी...पुलिस की छापेमारी से लेकर तमाम तरीके अपनाए जा रहे हैं। कई जगह पार्षदों के अपरहण के आरोप तक लग रहे हैं।
सबसे पहले मंडावा-मलसीसर... बाड़ाबंदी वाले होटल में पहुंची पुलिस
झुंझुनूं के मलसीसर में चेयरमैन चुनाव से पहले कांग्रेस पार्षदों की बाड़ाबंदी वाले होटल में पुलिस पहुंचने से सियासी विवाद खड़ा हो गया। 16 सितंबर को 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम ने होटल के कमरों की तलाशी ली। होटल में कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद ठहरे हुए थे।
मंडावा विधायक रीटा चौधरी ने आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव में पुलिस कांग्रेस पार्षदों को होटल से उठाने पहुंची। कांग्रेस ने इसे चुनाव के बाद जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश बताया।
कांग्रेस ने सीकर के धोद और लोसल तथा टोंक जिले की दूनी नगरपालिका में भी अपने और समर्थित पार्षदों पर पुलिस के जरिए दबाव बनाने, डराने या उन्हें ले जाने के प्रयास के आरोप लगाए हैं। दूनी में कांग्रेस ने अपनी अध्यक्ष प्रत्याशी और निर्वाचित पार्षदों को पुलिस के जरिए परेशान किए जाने का आरोप लगाया है।
टोंक जिले की देवली-उनियारा की दूनी नगरपालिका में कांग्रेस की अध्यक्ष प्रत्याशी और निर्वाचित पार्षदों को पुलिस के दम पर डराने, धमकाने और जबरन उठाने का एक और मामला सामने आया। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी ने पुलिस पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर मुझे परेशान किया तो मैं आत्महत्या कर लूंगी। कांग्रेस की तरफ से यह वीडियो सोशल मीडिया हेंडल पर भी डाला गया है।
जोधपुर में शिकायत और अस्पताल तक पहुंचा मामला
जोधपुर में वार्ड 76 की निर्वाचित पार्षद निर्मला नायक और उनके पति के कथित अपहरण की शिकायत का मामला भी राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन गया है। उपलब्ध बयान के मुताबिक शिकायत को लेकर थाने में मौजूद पार्षद के ससुर लक्ष्मण नायक की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें मथुरादास माथुर अस्पताल ले जाया गया। इसी बीच कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने जोधपुर और अलवर में निर्दलीय व कांग्रेस पार्षदों पर दबाव बनाने के लिए पुलिस के इस्तेमाल का आरोप लगाया है।
सिरोही में प्रशासनिक नोटिस ने बढ़ाई सियासी गर्मी
सिरोही में कांग्रेस के लगातार पांच बार पार्षद रहे जितेंद्र सिंघी को चुनावी प्रक्रिया के दौरान नोटिस जारी किए जाने को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। वहीं अब यहां कांग्रेस की ओर से सभापति का नामांकन भरने वाली ऋतु जैन के नामांकन को ही खारिज करने की आशंका जताई जा रही है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा का कहना है कि बिना शिकायत के निगम के अधिकारी अपने स्तर पर ही प्रत्याशियों को नोटिस देने की कार्रवाई कर रहे हैं। कांग्रेस ने जिला निर्वाचन अधिकारी को मामले की जानकारी देकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
खेतड़ी में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में गईं गीता
झुंझुनूं की खेतड़ी नगरपालिका में कांग्रेस से चुनाव जीतने वाली गीता सैनी अब भाजपा के साथ हैं और अध्यक्ष पद के लिए उनका नाम सामने आया है। यहां दल बदल ने चुनाव के बाद के गणित को बदल दिया है।
बगड़ में बीजेपी प्रत्याशी ने पाला बदला
बगड़ नगरपालिका में भी भाजपा से जुड़े रहे राकेश शर्मा के कांग्रेस खेमे में जाने से समीकरण बदलने की स्थिति बनी है। यहां भाजपा और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय पार्षदों की संख्या भी महत्वपूर्ण है।
श्रीगंगानगर में भाजपा के भीतर ही अध्यक्ष पद को लेकर खींचतान
श्रीगंगानगर नगर परिषद में 65 वार्ड हैं। उपलब्ध चुनाव परिणाम के अनुसार भाजपा के 30, कांग्रेस के 17 और निर्दलीय 18 पार्षद हैं। भाजपा सबसे बड़ा दल है, लेकिन अध्यक्ष बनाने के लिए निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी बीच भाजपा पार्षद संजय मूंदड़ा ने अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय नामांकन दाखिल किया और प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।