एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा
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राजधानी जयपुर में स्लीपर कोच और निजी बसों के संचालन से जुड़े ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड के हालिया फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। आल राजस्थान कांट्रैक्ट कैरिज बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन, जयपुर ने हीरापुरा (कमला नेहरू) बस टर्मिनल पर सभी स्लीपर कोच और स्टेज कैरिज बसों को स्थानांतरित करने के निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए इसे केवल विरोध नहीं, बल्कि “व्यवस्थित समाधान की मांग” बताया है। बता दें कि ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया कि 1 अगस्त 2025 से RSRTC की बसों सहित सभी स्लीपर और स्टेज कैरिज बसें हीरापुरा टर्मिनल से संचालित होंगी। इस निर्णय का उद्देश्य शहर के भीतरी क्षेत्रों में ट्रैफिक का दबाव कम करना और बस स्टैंड्स की अव्यवस्था को खत्म करना बताया गया है।
'हमें भीख नहीं, हक चाहिए'
एसोसिएशन का कहना है कि इस फैसले का प्रभाव केवल बस ऑपरेटर्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे होटल व्यवसाय, ऑटो-रिक्शा चालक, डीजल पंप, टोल टैक्स, और सड़क किनारे व्यवसाय करने वाले हजारों छोटे कारोबारियों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे न केवल निजी बस ऑपरेटरों की आमदनी घटेगी, बल्कि सरकार को भी रोड टैक्स, टोल टैक्स, पार्किंग शुल्क और होटल टैक्स जैसे राजस्व में भारी नुकसान होगा। एसोसिएशन प्रतिनिधियों ने साफ कहा, “हम सरकार से टकराव नहीं चाहते, हम किसी से भीख नहीं मांग रहे – हम अपना हक मांग रहे हैं। लोकतंत्र में हमें यह अधिकार मिला है कि अपनी आजीविका और जनहित से जुड़ी बातों को मजबूती से रख सकें।”
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सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में समावेशी समाधान की मांग
उन्होंने कहा कि जयपुर एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी है और यहां की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना ज़रूरी है, लेकिन यह केवल एकतरफा निर्णयों से संभव नहीं। एसोसिएशन ने सरकार से सभी हितधारकों को साथ लेकर समावेशी समाधान निकालने की अपील की है जिससे न सरकार को नुकसान हो और न ही छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हो।
राजस्व नुकसान की चेतावनी और खुले संवाद की मांग
बस ऑपरेटरों ने आगाह किया है कि यदि निर्णय को बिना पुनर्विचार लागू किया गया तो इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। उन्होंने सरकार से संयुक्त समिति के गठन की मांग की है, जिसमें परिवहन विभाग, पुलिस, प्रशासन और बस ऑपरेटर्स के प्रतिनिधि शामिल हों और इस मसले पर एक व्यावहारिक समाधान खोजा जा सके। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि वे आंदोलन की राह पर नहीं जाना चाहते, लेकिन यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जताने के लिए बाध्य होंगे।