राजस्थान उच्च न्यायालय ने थैलसीमिया से पीड़ित और 75 प्रतिशत स्थायी रूप से दिव्यांग भाई की देखभाल करने वाले यूको बैंक के प्रबंधक के तबादले को रद्द कर दिया है। अदालत ने बैंक की ओर से प्रबंधक को करीब 1,000 किलोमीटर दूर भेजने के आदेश को मनमाना और अमानवीय करार दिया। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बैंक कर्मचारियों की विशेष नीति और उनके आश्रितों की देखभाल के प्रावधानों की अनदेखी करके ऐसा कोई निर्णय लागू नहीं कर सकता।
मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंड की पीठ ने यूको बैंक के प्रबंधक राहुल अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए 16 मई को जारी तबादला आदेश को खारिज कर दिया। राहुल का स्थानांतरण जयपुर क्षेत्र की बानेटी शाखा से अहमदाबाद क्षेत्र की एक शाखा में किया गया था। अदालत ने कहा कि थैलसीमिया से पीड़ित व्यक्ति को हर 15 से 20 दिन में रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। ऐसे में देखभाल करने वाले व्यक्ति को बिना किसी उचित विचार के इतनी दूर भेजना, जहां कोई पारिवारिक सहायता या चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न हो, अमानवीय है। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का उल्लंघन करता है।
बैंक नीति के पालन की बाध्यता
अदालत के अनुसार, यूको बैंक की वर्ष 2024-27 की 'समान अवसर नीति' कोई दान नहीं, बल्कि वैधानिक दायित्व है। बैंक केवल प्रदर्शन के लिए नीति बनाकर उसके विपरीत आचरण नहीं कर सकता। इस नीति में दिव्यांगजनों और उनके देखभालकर्ताओं को नियमित या चक्रीय तबादले से छूट देने का प्रावधान है। राहुल के छोटे भाई आशीष कुमार अग्रवाल थैलसीमिया से पीड़ित हैं और 75 प्रतिशत स्थायी रूप से दिव्यांग हैं। राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 19 अप्रैल 2022 को उनका दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी किया था। आशीष इलाज, दवा और वित्तीय सहायता के लिए पूरी तरह राहुल पर निर्भर हैं। बैंक ने 8 सितंबर को राहुल का अभ्यावेदन बिना ठोस कारण बताए खारिज कर दिया था, जिसे अदालत ने मनमाना और भेदभावपूर्ण माना।
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प्रशासनिक बाधाओं की सीमा
सुनवाई के दौरान यूको बैंक ने दलील दी कि 1 अप्रैल 2026 को स्केल-1 से स्केल-2 में पदोन्नति के बाद तबादला अनिवार्य था। बैंक ने यह भी कहा कि राहुल जनवरी 2018 से जयपुर क्षेत्र की बानेटी शाखा में पदस्थ हैं और लगभग आठ वर्ष बिता चुके हैं। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक आवश्यकता का यांत्रिक बहाना बनाकर सुरक्षात्मक नीति के उद्देश्य को समाप्त नहीं किया जा सकता। उच्च न्यायालय ने 16 मई का स्थानांतरण आदेश रद्द करते हुए बैंक को निर्देश दिया कि वह राहुल को वर्तमान स्थान पर ही काम करने दे। जब तक बैंक विशेष नीति के तहत मामले पर पुनर्विचार नहीं कर लेता, तब तक राहुल बानेटी शाखा में ही तैनात रहेंगे।