राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव से पहले भाजपा ने गांवों में संगठन को मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है। हालिया निकाय चुनाव में कांग्रेस पर महज 0.94 प्रतिशत वोट शेयर की बढ़त मिलने के बाद भाजपा अब पंचायत स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए करीब 3 लाख कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां देने की तैयारी में है। पहले चरण में करीब डेढ़ लाख कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारने की योजना है।
निकाय चुनाव में भाजपा को 35.18 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर 34.24 प्रतिशत रहा। भाजपा को 37,35,567 और कांग्रेस को 36,35,952 वोट मिले। दोनों प्रमुख दलों के बीच अंतर 99,615 वोट का रहा। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों को 27.38 प्रतिशत वोट मिले। इस आंकड़े ने दोनों दलों के सामने स्थानीय स्तर पर संगठन और उम्मीदवारों की भूमिका को महत्वपूर्ण बना दिया है।
पंचायत स्तर तक जिम्मेदारी, बूथ से गांव तक नेटवर्क
भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ प्रबंधन, मतदाताओं से संपर्क, प्रचार की योजना और पंचायत स्तर पर समन्वय जैसी जिम्मेदारियां दी जाएंगी। इसके लिए प्रभारी और संयोजक नियुक्त किए जा रहे हैं। मंडल से लेकर पंचायत तक संगठन की कड़ियों को जोड़ने पर जोर है।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बागड़ी ने कहा कि संगठन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सक्रिय कार्यकर्ताओं को पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी देकर गांवों तक पार्टी का सीधा संपर्क मजबूत किया जाएगा।
पार्टी ने संभाग स्तर पर चुनाव संचालन समितियां भी गठित की हैं। इनमें पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, अरुण चतुर्वेदी, अलका गुर्जर और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी समेत वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारियां दी गई हैं। ये समितियां स्थानीय मुद्दों, मतदाताओं की प्राथमिकताओं और संगठन की स्थिति का फीडबैक जुटाएंगी।
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पंचायत चुनाव की तैयारी के बीच मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 23 सितंबर से 3 अक्टूबर के बीच 19 जिलों का दौरा किया। इन दौरों में विकास कार्यों के शिलान्यास और लोकार्पण के साथ जनसभाएं तथा कार्यकर्ताओं से संवाद भी हुआ।
पार्टी के अनुसार पांच राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं ने भी 23 जिलों और संगठनात्मक क्षेत्रों में बैठकें कीं। राजस्थान प्रभारी संजय भाटिया ने खैरथल-तिजारा, अलवर, भरतपुर और दौसा में संगठनात्मक बैठकें कीं। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ समेत अन्य नेताओं ने भी जिलों में तैयारियों की समीक्षा की।
भाजपा गांवों में विकास कार्यों की जानकारी जुटाने और उन्हें प्रचार से जोड़ने के लिए ग्राम रथों के जरिए अभियान चलाने की तैयारी भी कर रही है। मदन राठौड़ ने कहा कि निकाय चुनाव की तरह पंचायत चुनाव में भी जनता भाजपा को समर्थन देगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्य तथा मजबूत संगठन पार्टी की जीत का आधार बनेंगे।
कांग्रेस का फोकस- संगठन, उम्मीदवार और क्रॉस वोटिंग
भाजपा की तैयारियों के समानांतर कांग्रेस भी पंचायत चुनाव के लिए संगठन को सक्रिय करने में जुटी है। जिला स्तर की बैठकों के बाद संभाग स्तर पर बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि वरिष्ठ नेता सीधे कार्यकर्ताओं के बीच जाएं और चुनावी अभियान में उनकी भागीदारी बढ़े।
निकाय चुनाव में वार्ड स्तर पर अच्छी स्थिति के बावजूद कई जगह बोर्ड बनाने में असफल रहने के बाद कांग्रेस अब क्रॉस वोटिंग और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच समन्वय को गंभीरता से देख रही है। पार्टी ने निकाय चुनाव में क्रॉस वोटिंग और दूसरी शिकायतों की जांच के लिए नौ सदस्यीय समिति बनाई है।
कांग्रेस के एक नेता के अनुसार पंचायत चुनाव में लंबे समय से पार्टी के साथ जुड़े कार्यकर्ताओं, संगठन या पंचायत स्तर पर काम कर चुके नेताओं और जमीनी पकड़ रखने वाले लोगों को टिकट में प्राथमिकता देने पर जोर रहेगा। पार्टी इस बार टिकट जल्दी घोषित करने की रणनीति पर भी काम कर रही है, ताकि उम्मीदवारों को प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
डोटासरा-जूली ने शुरू किया चुनावी अभियान
कांग्रेस ने शुक्रवार को नागौर के डेगाना में कार्यकर्ता सम्मेलन के साथ पंचायत चुनाव की तैयारियों का औपचारिक आगाज किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कार्यकर्ताओं से चुनाव की तैयारी में जुटने का आह्वान किया। इसके बाद बीकानेर में बैठक हुई। आने वाले दिनों में दूसरे जिलों में भी ऐसे कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
कांग्रेस के सामने गुटबाजी और टिकट वितरण की चुनौती
पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने संगठन के भीतर चल रही खींचतान को संभालना बड़ी चुनौती होगी। निकाय चुनाव परिणाम के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा को लेकर की गई टिप्पणी, पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह का भरतपुर में डोटासरा के दौरे को लेकर विरोध और भीलवाड़ा में 17 उम्मीदवारों के पार्टी सिंबल समय पर जमा नहीं होने को लेकर हुए प्रदर्शन ने संगठनात्मक असंतोष को सामने ला दिया था।
ऐसे में टिकट वितरण के दौरान गुटबाजी को नियंत्रित करना कांग्रेस के लिए अहम होगा। पार्टी की कोशिश है कि उम्मीदवारों के चयन के साथ निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल भी सुनिश्चित किया जाए।
गांवों के मुद्दों पर कांग्रेस सरकार को घेरेगी
कांग्रेस पंचायत चुनाव में किसानों और गांवों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की तैयारी में है। डोटासरा लगातार खाद की उपलब्धता, कथित नकली बीज, दूध बोनस, सिंचाई के लिए बिजली और पानी जैसे मुद्दे उठा रहे हैं।
डोटासरा ने डीएपी के लिए किसानों को कई दिनों तक कतार में खड़े रहने और कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में गांवों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और जनता में नाराजगी है।