केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री और अजमेर सांसद भगीरथ चौधरी को बागवानी योजना के तहत करीब 99.6 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने का मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। एक तरफ भागीरथ चौधरी आरोपों को खारिज कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं।
गहलोत ने साधा निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने आरोप लगाया कि यह हितों के टकराव और संस्थागत भ्रष्टाचार का उदाहरण है। गहलोत ने सवाल उठाया कि जिस मंत्रालय की योजना है, उसी मंत्रालय के राज्यमंत्री को लगभग एक करोड़ रुपये की सब्सिडी कैसे मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आम किसान सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरते हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों को आसानी से बड़े लाभ मिल जाते हैं।
चौधरी ने आरोपों को किया खारिज
भगीरथ चौधरी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे कोई तथ्य नहीं छुपा रहे हैं। वह बचपन से खेती-किसानी से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि सब्सिडी के लिए आवेदन उन्होंने वर्ष 2018 में दिया था। जब वह केंद्रीय मंत्री नहीं थे। परियोजना से जुड़े ऋण और सब्सिडी की जानकारी भी उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषित की थी।
चौधरी के अनुसार उनका फार्म किसानों के लिए डेमोंस्ट्रेशन सेंटर के रूप में काम करता है, जहां आधुनिक खेती और प्राकृतिक कृषि का प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि हजारों किसान पॉलीहाउस लगाकर सरकारी सब्सिडी का लाभ लेते हैं। उनकी परियोजना का भी स्थानीय अधिकारियों ने निरीक्षण किया था।
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बीजेपी ने भी किया बचाव
राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भगीरथ चौधरी का बचाव करते हुए कहा कि सब्सिडी स्वीकृत करने वाली समिति में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। राठौड़ ने कहा कि चौधरी ने पहले भी तीन बार आवेदन किया था, लेकिन पात्रता शर्तें पूरी नहीं होने के कारण आवेदन खारिज हो गए थे। सभी नियम पूरे होने के बाद ही उन्हें सब्सिडी स्वीकृत की गई। उन्होंने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि भी पात्रता की शर्तें पूरी करता है तो उसे सरकारी योजना का लाभ लेने से नहीं रोका जा सकता।