गहलोत ने पूर्व विधायक की हत्या के बाद सरकार को घेरा
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राजस्थान के भरतपुर जिले में बयाना के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की हत्या के मामले ने बेहद गंभीर राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। खनन पट्टे और क्रेशर प्लांट के संचालन को लेकर पिछले दो वर्षों से चल रहे विवाद के बाद हुई इस सनसनीखेज वारदात ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन और स्थानीय खुफिया तंत्र के पास संभावित हमले के इनपुट पहले से मौजूद थे, लेकिन समय पर ठोस कार्रवाई न होने से यह खूनी संघर्ष हुआ।
पुलिस और खुफिया तंत्र की घोर लापरवाही
मामले में पुलिस प्रशासन की बड़ी ढिलाई सामने आई है। ग्रामीणों और लीज संचालक के बीच पिछले सात दिनों से लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई थी। धरने पर बैठे ग्रामीणों के साथ दो बार समझाइश के दौरान तीखी कहासुनी भी हुई थी, जिसकी सूचना स्थानीय पुलिस अधिकारियों को दी गई थी। इसके बावजूद पुलिस ने इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से नहीं लिया। वारदात से एक दिन पहले भी 50 से 60 लोगों का टॉर्च लेकर लीज क्षेत्र में सर्च करने का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। इसके बाद भी कोई सुरक्षात्मक कदम न उठाए जाने के कारण डेढ़ घंटे तक पथराव और खूनी हिंसा होती रही।
विपक्षी नेताओं ने सरकार को घेरा
इस घटना के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वक्तव्य जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में पूर्व विधायक की हत्या से स्पष्ट है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। दो वर्षों से सुलग रहे विवाद की जानकारी होने के बाद भी पुलिस का निष्प्रभावी रहना उसकी बड़ी नाकामी को दर्शाता है। वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि दिनदहाड़े हिंसा और जनप्रतिनिधि की हत्या कानून के इकबाल के खत्म होने का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन ने अपराधियों के आगे पूरी तरह समर्पण कर दिया है और पुलिस बल का प्रयोग केवल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। वहीं बूंदी से विधायक हरिमोहन शर्मा ने बताया कि गुंडागर्दी और हमले की साजिश की पूरी जानकारी पुलिस के पास पहले से उपलब्ध थी। यदि पुलिस समय पर अपने कर्तव्य का सही निर्वहन करते हुए विवादित खनन स्थल को सीज कर देती, तो इस बड़ी खूनी वारदात को आसानी से टाला जा सकता था।
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दो वर्षों से जारी था खनन विवाद
थानाधिकारी धीरेंद्र सिंह के अनुसार, ग्रामीणों और क्रेशर संचालक के मध्य पिछले दो वर्षों से विवाद चल रहा था। ग्रामीणों का आरोप था कि बयाना के पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना की पत्नी कमलेश भड़ाना गांव में अवैध रूप से खनन करवा रही हैं। ग्रामीणों ने इसके विरोध में लगातार धरना भी दिया था, जिसमें धौलपुर सांसद भजनलाल जाटव भी शामिल हुए थे। ग्रामीणों का कहना था कि लीज पर दिन-रात किए जाने वाले धमाकों से उनका सोना कठिन हो गया है और खनन कार्य में लगे कर्मचारी जंगली जानवरों का शिकार करते हैं। इन तमाम गंभीर शिकायतों के बावजूद ठोस कदम न उठाए जाने से स्थिति अत्यंत विकराल हो गई।