राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 1500 अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने की घोषणा के बावजूद यह योजना अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी यह पहल सीमित स्तर पर ही आगे बढ़ पाई है। फिलहाल केवल 614 स्कूलों तक ही इस योजना का कार्य शुरू हो सका है, जबकि शेष लैब के लिए सरकार अब केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रही है। इससे योजना की प्रगति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
2025-26 के बजट में की गई थी बड़ी घोषणा
सरकारी स्कूलों में नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 के बजट में 1500 अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने की घोषणा की गई थी। हालांकि एक साल गुजरने के बावजूद योजना पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर सकी है। अब तक 614 स्कूलों के लिए ही वर्क ऑर्डर जारी किए गए हैं, जिससे योजना की गति अपेक्षा से धीमी नजर आ रही है।
पहले चरण में 614 विद्यालयों का चयन
सरकार का कहना है कि योजना के पहले चरण में 614 राजकीय विद्यालयों का चयन किया गया है। इन स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इन लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे प्रयोगों और प्रोजेक्ट के जरिए नई तकनीकों को समझ सकें।
बाकी 886 लैब के लिए केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव
सरकार ने स्पष्ट किया है कि शेष 886 अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने के लिए वर्ष 2026-27 और 2027-28 में केंद्र प्रायोजित योजना के तहत प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद ही इन लैब की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
क्या है अटल टिंकरिंग लैब का उद्देश्य?
अटल टिंकरिंग लैब का उद्देश्य स्कूल स्तर पर छात्रों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित करना है। इन लैब में विद्यार्थियों को रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, 3D प्रिंटिंग और अन्य आधुनिक तकनीकों से जुड़े उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे छात्र अपने विचारों को मॉडल और प्रोजेक्ट के रूप में विकसित कर सकते हैं। सरकार का कहना है कि योजना पूरी तरह लागू होने के बाद प्रदेश के हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा और नवाचार के नए अवसर मिलेंगे।
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जिलों के कई स्कूलों को किया गया शामिल
प्रदेश में कुल 614 एटीएल लैब स्थापित करने के लिए विभिन्न जिलों के स्कूलों का चयन किया गया है। इनमें अजमेर में 5, अलवर में 8, बालोतरा में 11, बांसवाड़ा में 7, बारां में 43, बाड़मेर में 19, ब्यावर में 8, भरतपुर में 20, भीलवाड़ा में 8 और बीकानेर में 30 स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा बूंदी में 4, चित्तौड़गढ़ में 4, चूरू में 30, दौसा में 9, डीग में 10, धौलपुर में 40, डीडवाना-कुचामन में 6 और डूंगरपुर में 26 स्कूलों का चयन किया गया है।
इसी प्रकार श्रीगंगानगर में 30, हनुमानगढ़ में 11, जयपुर में 7, जैसलमेर में 61, जालोर में 9, झालावाड़ में 6, झुंझुनूं में 6, जोधपुर में 22 और करौली में 42 स्कूलों को भी इस योजना में शामिल किया गया है। वहीं खैरथल-तिजारा में 1, कोटा में 4, कोटपूतली-बहरोड़ में 3, नागौर में 23, पाली में 13, फलोदी में 3, प्रतापगढ़ में 3, राजसमंद में 3, सलूम्बर में 3, सवाई माधोपुर में 11, सीकर में 11, सिरोही में 41, टोंक में 5 और उदयपुर में 5 स्कूलों में एटीएल लैब स्थापित की जानी है।