पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने आईएएस शिखर अग्रवाल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले को मौजूदा सरकार का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए ईडी-सीबीआई जांच की मांग की। उन्होंने सीएमओ की भूमिका, अमेरिका में मौजूद अधिकारी दंपती और उदयपुर आईजी की पोस्टिंग पर भी सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका पर भी उठाए सवाल
गहलोत बोले- 40 विला एक साथ लेने की खबर चौंकाने वाली है। इसके लिए सीएम को खुद को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मीटिंग होने के बाद इस कंपनी को छूट दी गई। उन्होंने कहा कि जिन पर यह आरोप लगे हैं वह भी इन्हें झुटला नहीं सकते हैं क्योंकि बतौर कलेक्टर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चेयरमैन और सीएमओ के एसीएस रहने के दौरान जो फैसले हुए हैं वह अपने आप में यह स्पष्ट करते हैं कि जानबूझ कर करेप्शन की हदें पार करते हुए फैसले किए हैं। गहलोत बाले कि आप सोच सकते हैं कि सीएमओ में और क्या-क्या घोटाले हाे रहे हैं।
इसके बाद गहलोत ने सीएमओ में एक कथित विवाद का जिक्र करते हुए कहा उदयपुर आईजी की पोस्टिंग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि एक बार खबर आई थी कि सीएमओ में आईजी सीएमओ, सीएम और उनके परिवार के किसी सदस्य के बीच छीना झपटी हो गई। गहलोत बोले कि इतना बड़ा कांड होने के बाद भी आईजी को सीएमओ से हटाकर उदयपुर में प्राइज पोस्टिंग दी गई। गहलोत बोले यह प्राइस पोस्टिंग उन्हें सिर्फ मुंह बंद करने के लिए ही दी गई। उन्होंने कहा कि उदयपुर में जयपुर से ज्यादा करेप्शन है। उन्होंने कहा कि शिखर अग्रवाल भी पहले उदयपुर कलेक्टर रह चुके हैं।
मुख्यमंत्री के रिश्तेदारों और प्रमोद शर्मा का भी जिक्रगहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अपनी पुरानी सलाह याद दिलाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को अपने रिश्तेदारों को सत्ता और प्रशासन से दूर रखना चाहिए। उन्होंने प्रमोद शर्मा का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि वह जयपुर में घूम रहे हैं, जबकि पुलिस रिकॉर्ड में फरार हैं। गहलोत ने दावा किया कि उनके मुख्यमंत्री रहते प्रमोद शर्मा को भरतपुर में पकड़ा गया था। उन्होंने मुख्यमंत्री की शपथ से पहले एक मामले को बंद किए जाने पर भी सवाल उठाए।