वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के अनंता रिसॉर्ट में विला खरीदने को लेकर विवाद के बीच अब इस रिसॉर्ट से जुड़ा एक पुराना मामला भी चर्चा में है। अलवर के अजबगढ़ में सरिस्का टाइगर रिजर्व के पास बने इसी रिसॉर्ट पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे। मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पहुंचा तो जांच के लिए सरकारी कमेटी बनाई गई। कमेटी की रिपोर्ट में रिसॉर्ट के निर्मित क्षेत्र को पर्यावरण मंजूरी की तय सीमा से कम पाया गया। रिपोर्ट आने के बाद एनजीटी ने मामले का निपटारा कर दिया।
मामला अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता स्पा एंड रिसॉर्ट शिकायतकर्ता हेमराज मीणा एनजीटी में याचिका लगाई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सरिस्का टाइगर रिजर्व के नजदीक बने रिसॉर्ट ने पर्यावरणीय मंजूरी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति और भूजल निकासी की अनुमति सहित जरूरी स्वीकृतियां नहीं लीं। साथ ही, यहां गैरमुमकिन नाले की जमीन पर निर्माण करने और पानी का बहाव रोकने का आरोप भी लगाए।
NGT के निर्देश पर चार सदस्यीय कमेटी ने की जांच
अधिकरण ने 6 जुलाई 2026 को मामले में नोटिस जारी कर चार सदस्यीय संयुक्त कमेटी बनाई थी। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया। कमेटी में वन विभाग, अलवर जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय भूजल बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल थे। कमेटी ने 6 अक्टूबर को रिसॉर्ट का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश की।
रिपोर्ट के अनुसार, रिसॉर्ट 99,100 वर्ग मीटर भूमि पर बना बताया गया जिसमें इसका कुल निर्मित क्षेत्र 19,377.91 वर्ग मीटर दर्ज किया गया। कमेटी रिपोर्ट में कहा गया कि पर्यावरणीय मंजूरी के लिए 20,000 वर्ग मीटर का निर्मित क्षेत्रफल होना चाहिए, इसलिए इस परियोजना के लिए पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी जरूरी नहीं थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 14 दिसंबर 2023 को स्थापना और 24 दिसंबर 2024 को संचालन की सहमति भी जारी की थी।
सरिस्का के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट से करीब 200 मीटर दूर
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि अनंता रिसॉर्ट जिस जमीन पर बना है, वह सरिस्का के टाइगर हैबिटेट का हिस्सा है। लेकिन जांच कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक, रिसॉर्ट सरिस्का के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट से करीब 200 मीटर दूर है। रिपोर्ट में बताया गया कि जमीन के एक हिस्से को रिसॉर्ट बनाने के लिए 24 अक्टूबर 2018 को कृषि भूमि से पर्यटन उपयोग की जमीन में बदला गया था। जबकि सरिस्का के इको सेंसिटिव जोन की प्रारूप अधिसूचना बाद में, 2 नवंबर 2023 को जारी हुई थी। यानी जमीन के उपयोग में बदलाव अधिसूचना जारी होने से करीब पांच साल पहले हुआ था।
शिकायत में खसरा संख्या 92 को गैर मुमकिन नाला बताते हुए वहां निर्माण और पानी का बहाव रोकने का आरोप लगाया गया था। कमेटी ने निरीक्षण में इस खसरे को रिसॉर्ट की सर्वे सीमा से बाहर पाया। रिपोर्ट के अनुसार, वहां पानी का बहाव अवरुद्ध नहीं था और आरोपित स्थायी निर्माण या व्यावसायिक उपयोग भी नहीं मिला।
बिना वैध NOC भूजल निकालने पर 1.44 करोड़ रुपये जमा
जांच में भूजल निकालने का मामला भी सामने आया। रिसॉर्ट को चार बोरवेल से रोजाना 195 घन मीटर पानी निकालने की अनुमति मिली थी। इसके लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने तीन अक्टूबर 2026 को एनओसी जारी की, जो 16 जुलाई 2028 तक मान्य है।
हालांकि, रिसॉर्ट ने 25 मार्च 2023 से 15 जुलाई 2026 तक वैध अनुमति के बिना भूजल निकाला था। इसके लिए एक करोड़ 41 लाख 33 हजार 561 रुपये पर्यावरणीय मुआवजा, भूजल की भरपाई के लिए एक लाख 97 हजार 728 रुपये शुल्क और देरी से आवेदन करने पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया गया। इस तरह कुल एक करोड़ 44 लाख 31 हजार 289 रुपये जमा किए गए।