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राजस्थान: राजस्थान के 42 निजी कृषि कॉलेजों में नए दाखिलों पर रोक, 2,520 सीटों पर नहीं मिलेगा प्रवेश

Thu, 29 Oct 2026 12:55 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारां

सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के करीब 42 निजी कृषि कॉलेजों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) रद्द करने के कृषि विभाग के फैसले को सही ठहराया है। न्यायाधीश नूपुर भाटी ने सात प्रमुख निजी कृषि महाविद्यालयों की याचिकाएं खारिज कर दीं।
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राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट ने नियमों का पालन नहीं करने वाले प्रदेश के करीब 42 निजी कृषि कॉलेजों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) रद्द करने के कृषि विभाग के फैसले को सही ठहराया है। अदालत ने सात प्रमुख निजी कृषि महाविद्यालयों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके बाद शैक्षणिक सत्र 2026-27 में इन संस्थानों में नए दाखिलों पर रोक लग गई है। इस फैसले से संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेट) के माध्यम से बीएससी कृषि में करीब 2,520 सीटों पर प्रवेश नहीं हो सकेगा। हालांकि, इन कॉलेजों में पहले से पढ़ रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रहेगी और वे अपनी डिग्री पूरी कर सकेंगे।

42 निजी कृषि कॉलेजों की एनओसी रद्द, प्रवेश प्रक्रिया से बाहर हुए संस्थान

राजस्थान में पिछले तीन वर्षों से वर्ष 2022 की राज्य कृषि शिक्षा नीति की अनिवार्य शर्तों और निर्धारित मानकों का पालन किए बिना संचालित हो रहे निजी कृषि कॉलेजों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रवेश प्रक्रिया से बाहर हुए 42 संस्थानों में 31 निजी कृषि कॉलेज और 11 निजी विश्वविद्यालयों से संबद्ध कृषि कॉलेज शामिल हैं। यदि प्रत्येक कॉलेज में न्यूनतम 60 स्वीकृत सीटें मानी जाएं, तो इन संस्थानों में बीएससी कृषि की कुल करीब 2,520 सीटों पर इस बार प्रवेश प्रक्रिया नहीं हो सकेगी। इसका सीधा असर शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कृषि की पढ़ाई के लिए दाखिला लेने की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर पड़ेगा।

हाईकोर्ट ने सात निजी कृषि कॉलेजों की याचिकाएं खारिज कीं

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर की ओर से आयोजित जेट काउंसिलिंग-2026 के दौरान कृषि आयुक्त ने 10 अक्टूबर को नियमों की अनदेखी करने वाले कॉलेजों की एनओसी विस्तार संबंधी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। ये याचिकाएं शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एनओसी के विस्तार से जुड़ी थीं।

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कृषि विभाग के इस प्रशासनिक आदेश को चुनौती देते हुए निजी कृषि महाविद्यालयों ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। विकल्प फॉर्म भरने की अंतिम तिथि से ठीक पहले रविवार देर रात न्यायाधीश नूपुर भाटी ने सात प्रमुख निजी कृषि महाविद्यालयों की याचिकाएं खारिज कर दीं। इसके बाद विभाग ने 42 कॉलेजों की एनओसी रद्द करने की कार्रवाई पूरी की।

आईसीएआर की मान्यता के लिए छह साल की छूट पर कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कॉलेजों की ओर से तर्क दिया गया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से मान्यता प्राप्त करने के लिए छह वर्ष की समय-सीमा मिलती है। इसलिए इस अवधि को ध्यान में रखते हुए कॉलेजों को राहत दी जानी चाहिए। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि छह वर्ष की अवधि केवल अंतिम मान्यता प्राप्त करने के लिए है। इसका अर्थ यह नहीं है कि कॉलेज इस दौरान हर साल एनओसी के विस्तार के लिए निर्धारित 11 बुनियादी शर्तों का पालन करने से बच सकते हैं। न्यायालय ने कहा कि आईसीएआर की अंतिम मान्यता के लिए निर्धारित समय-सीमा को वार्षिक एनओसी विस्तार की अनिवार्य शर्तों से बचने का आधार नहीं बनाया जा सकता। शिक्षा की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के मामले में किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता।

पुराने विद्यार्थियों की पढ़ाई पर नहीं पड़ेगा असर

हाईकोर्ट के आदेश और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस फैसले का असर इन कॉलेजों में पहले से पढ़ रहे विद्यार्थियों पर नहीं पड़ेगा। मौजूदा विद्यार्थी बिना किसी रुकावट के अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अपनी डिग्री पूरी कर सकेंगे। यह रोक केवल शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान नए दाखिलों और काउंसिलिंग प्रक्रिया पर लागू होगी। ऐसे में नए विद्यार्थियों को इन 42 संस्थानों में प्रवेश नहीं मिल सकेगा, जबकि पहले से नामांकित विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रहेगी।

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