जयपुर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू की गई ट्रैफिक मार्शल योजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। ट्रैफिक मार्शल के रूप में कार्यरत युवाओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले चार महीनों से वेतन नहीं मिला है और अब बिना किसी लिखित आदेश के मौखिक रूप से ड्यूटी से हटाया जा रहा है।
अपनी मांगों को लेकर बड़ी संख्या में ट्रैफिक मार्शल सोमवार को जयपुर के रामनिवास बाग में एकत्रित हुए। इसके बाद वे विरोध प्रदर्शन करते हुए सिविल लाइंस पहुंचे, जहां उन्होंने कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं।
“बिना आदेश हटाया जा रहा”
चौमू निवासी अजीत सिंह ने बताया कि पूर्व ट्रैफिक डीसीपी सुमित महरड़ा के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों को अब नए अधिकारी के आने के बाद बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का लिखित आदेश जारी किए बिना ही ट्रैफिक मार्शल को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भरतपुर निवासी अरुण सिनसिनवार ने बताया कि उन्होंने फरवरी में ट्रैफिक मार्शल के रूप में जॉइन किया था। यह नौकरी उनकी पढ़ाई और दैनिक खर्चों में मददगार थी, लेकिन अब तक उन्हें कोई मेहनताना नहीं मिला। वहीं सविता कुमारी ने आरोप लगाया कि ट्रैफिक मार्शल की उपस्थिति जानबूझकर दर्ज नहीं की जा रही है और ऑफिशियल ग्रुप भी बंद कर दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जयपुर में योजना कमजोर की जा रही है, तब जोधपुर में इसे शुरू किया जा रहा है। पूजा ने बताया कि वह अलवर की रहने वाली हैं और जयपुर में एमए की पढ़ाई कर रही हैं। उन्हें उम्मीद थी कि इस नौकरी से पढ़ाई और रहने का खर्च निकल सकेगा।
खाचरियावास ने सरकार पर साधा निशाना
पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जयपुर में लोग घंटों ट्रैफिक जाम में फंसे रहते हैं, लेकिन सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक मार्शल की जरूरत शहर में लगातार बढ़ रही है। सरकार को उन्हें हटाने के बजाय जरूरत के अनुसार और नियुक्तियां करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रैफिक मार्शल के साथ होमगार्ड की तैनाती भी की जानी चाहिए थी।
खाचरियावास ने कहा कि जयपुर के प्रमुख इलाकों जैसे सी-स्कीम, सिविल लाइंस और 200 फीट रोड पर लंबे जाम लगते हैं, क्योंकि पर्याप्त ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से तुरंत दखल देने और हटाए गए ट्रैफिक मार्शल को वापस लगाने की मांग की।
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1009 ट्रैफिक मार्शल कर रहे थे ड्यूटी
जानकारी के अनुसार, कुल 1419 पदों में से 1009 पद जयपुर के लिए स्वीकृत किए गए थे। 20 जनवरी से ट्रैफिक मार्शल पुलिस कांस्टेबल के साथ चौराहों और सड़कों पर ड्यूटी कर रहे थे। इनके लिए मासिक मानदेय 6000 रुपये तय किया गया था। यह योजना दिल्ली और मुंबई की तर्ज पर शुरू की गई थी, ताकि बढ़ते ट्रैफिक और पुलिस बल की कमी से निपटा जा सके। इसके तहत 10वीं पास और ड्राइविंग लाइसेंस धारक युवाओं को चयनित कर प्रशिक्षण दिया गया था।