उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल में रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस खास सीसीटीवी कैमरे लगाने की तैयारी चल रही है। अब स्टेशनों पर लगे ये कैमरे केवल रिकॉर्डिंग नहीं करेंगे, बल्कि किसी भी प्रकार के खतरे या संदिग्ध गतिविधि की पहचान करके तुरंत अलर्ट जारी करेंगे।
इस नई पहल की शुरुआत जयपुर मंडल के आठ प्रमुख रेलवे स्टेशनों से की जा रही है, जिनमें जयपुर, गांधीनगर, सांगानेर, अलवर, रेवाड़ी, बांदीकुई, रींगस और किशनगढ़ शामिल हैं। इन कैमरों को सीधे केंद्रीकृत सीसीटीवी मॉनिटरिंग सेंटर या कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा, जिससे पूरे स्टेशन परिसर का रियल टाइम विश्लेषण करना संभव होगा।
हादसों और अनधिकृत प्रवेश पर लगेगी रोक
एआई तकनीक से लैस ये आधुनिक कैमरे स्टेशन परिसर से लेकर पटरियों तक की गहन निगरानी रखेंगे। ये कैमरे अनधिकृत प्रवेश को रोकने में भी बेहद कारगर साबित होंगे। रेलवे ट्रैक पर किसी भी व्यक्ति या पशु के आते ही यह प्रणाली तुरंत सायरन या अलर्ट जारी कर देगी, जिससे समय रहते हादसों को रोका जा सकेगा। इसके अलावा, यदि स्टेशन परिसर या पटरियों के आसपास कोई संदिग्ध व्यक्ति दिखाई देता है, तो उसकी सूचना भी तुरंत सुरक्षाकर्मियों तक पहुंच जाएगी।
भीड़ नियंत्रण और यात्रियों की सुरक्षा
त्योहारों या व्यस्त समय में रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ इकट्ठा होना सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ा जोखिम होता है। यह एआई आधारित प्रणाली प्लेटफॉर्म या ओवरब्रिज पर असामान्य रूप से भीड़ जमा होते ही सुरक्षा तंत्र को सतर्क कर देगी। इससे सुरक्षा बल समय रहते भीड़ को नियंत्रित करने के आवश्यक कदम उठा सकेंगे। इसके साथ ही, ट्रेन में चढ़ते समय किसी यात्री के गिरने, प्लेटफॉर्म पर लंबे समय तक कोई लावारिस वस्तु पड़ी रहने या किसी व्यक्ति द्वारा कैमरे को ढकने व उसकी दिशा बदलने की कोशिश करने पर भी कंट्रोल रूम में तुरंत सूचना पहुंचेगी।
यात्री सुरक्षा को अधिक मजबूत करने में मदद
इस नई प्रणाली में एआई स्मार्ट सर्च की सुविधा भी शामिल है, जो आपात स्थिति में सुरक्षाकर्मियों की मदद करेगी। स्टेशन पर यदि कोई बच्चा या सामान गुम हो जाता है, अथवा कोई संदिग्ध व्यक्ति अपराध करके भागने की कोशिश करता है, तो उसे कपड़ों के रंग, बैग के प्रकार और शारीरिक विशेषताओं के आधार पर आसानी से खोजा जा सकेगा। इस तकनीक से स्टेशन परिसरों में अपराधों पर अंकुश लगाने और यात्री सुरक्षा को अधिक मजबूत करने में मदद मिलेगी।