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Jaipur News: आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने और पीड़िता को धमकाने पर हाईकोर्ट सख्त, दुष्कर्म के आरोपी की जमानत रद्द

Wed, 03 Jun 2026 03:37 PM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी की जमानत रद्द कर दी है। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी ने अपना आपराधिक रिकॉर्ड छिपाया है। साथ ही जमानत मिलने के बाद पीड़िता व गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की।
 
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राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक चर्चित मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी दानिश हनिफी को पूर्व में दी गई जमानत रद्द कर दी है। अदालत ने माना कि आरोपी ने जमानत प्राप्त करते समय अपने आपराधिक इतिहास की पूरी जानकारी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की और जमानत मिलने के बाद पीड़िता एवं गवाहों को प्रभावित करने तथा धमकाने का प्रयास किया।

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जस्टिस गणेशराम मीणा ने दुष्कर्म पीड़िता की ओर से दायर जमानत निरस्तीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। मामला कोटा शहर में दर्ज दुष्कर्म प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप है कि आरोपी ने पारिवारिक विश्वास और निकटता का दुरुपयोग करते हुए पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया था।

जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। निचली अदालत से राहत नहीं मिलने पर आरोपी ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे 23 अक्टूबर 2024 को स्वीकार कर लिया गया था। हालांकि इसके बाद पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया कि आरोपी और उसके सहयोगी लगातार उसे तथा उसके परिवार को धमका रहे हैं और बयान बदलने का दबाव बना रहे हैं।
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याचिका में कहा गया कि अदालत में बयान दर्ज कराने पहुंचने पर भी पीड़िता को धमकाया गया और चेतावनी दी गई कि यदि उसने आरोपी के खिलाफ बयान दिया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष अदालत परिसर तक में दबाव बनाने का प्रयास कर रहा था, जिसके चलते उसे सुरक्षा की मांग करनी पड़ी। सुनवाई के दौरान पीड़िता पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी के खिलाफ लगभग 22 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि जमानत याचिका में इनकी सही जानकारी नहीं दी गई थी। अदालत ने माना कि लंबित मामलों की वास्तविक संख्या छिपाना गंभीर तथ्य है, जो जमानत पर विचार करते समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि जमानत मिलने के बाद आरोपी के खिलाफ धमकी और दबाव बनाने से जुड़े कई मामलों में पुलिस जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अदालत ने कहा कि गवाहों को प्रभावित करना, न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना और निष्पक्ष सुनवाई को प्रभावित करने वाली गतिविधियां जमानत रद्द करने के पर्याप्त आधार हैं।
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एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख करते हुए अदालत ने कहा कि अक्टूबर 2024 में जमानत मिलने के बावजूद आरोपी ने लगभग डेढ़ वर्ष बाद तक जमानती बॉन्ड प्रस्तुत नहीं किए थे। सभी परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत निरस्तीकरण याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी के पक्ष में पारित जमानत आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि उक्त आदेश के आधार पर कोई जमानती बॉन्ड या जमानतदार स्वीकार किए गए हैं तो वे भी स्वतः निरस्त माने जाएंगे।

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