जयपुर के प्रताप नगर में सरकारी नौकरी के लालच में सुपारी देकर मां की हत्या कराने के चर्चित मामले में पुलिस जांच के दौरान एक नया और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। पुलिस ने मृतका नीरज शर्मा के घर के सीसीटीवी फुटेज जब्त किए हैं, जो हत्या से करीब पांच दिन पहले के बताए जा रहे हैं। इन वीडियो में कुछ धार्मिक या तांत्रिक अनुष्ठान जैसी संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दे रही हैं, जिनकी पुलिस गहराई से जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक फुटेज में रोली-मौली और अन्य पूजा सामग्री को जलाते हुए देखा गया है। यह प्रक्रिया एक से अधिक बार दोहराई गई। दावा किया जा रहा है कि मुख्य आरोपी आयुषी शर्मा अपने साथियों के साथ घर की सीढ़ियों पर तंत्र-मंत्र से जुड़ा नारियल और काली गुड़िया रखकर उन्हें आग लगा रही थी। हालांकि पुलिस ने अभी इसे पूरी तरह टोना-टोटका नहीं माना है और सभी पहलुओं की वैज्ञानिक व तकनीकी जांच की जा रही है।
डीसीपी ईस्ट रंजीता शर्मा ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में कुछ संदिग्ध गतिविधियां मिली हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि आरोपी किसी तांत्रिक या ऐसे किसी व्यक्ति के संपर्क में थे या नहीं और 27 जून से पहले भी इस तरह की कोई गतिविधि हुई थी या नहीं। इसकी जांच के साथ-साथ जयपुर और भरतपुर में आरोपियों के संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।
गौरतलब है कि मृतका नीरज शर्मा के पति विजय वशिष्ठ का एक वर्ष पहले निधन हो गया था, जो कोर्ट में एलडीसी थे। पति की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के तहत करीब आठ महीने पहले नीरज शर्मा को एलडीसी की नौकरी मिली थी। पुलिस का दावा है कि उनकी बेटी आयुषी स्वयं यह नौकरी पाना चाहती थी, लेकिन मां के नौकरी जॉइन करने के बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। इसी विवाद के चलते मां की हत्या की पूरी साजिश रची गई।
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पिता की मौत पर भी उठे सवाल
मृतका के भाई राकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि पिता की मौत के बाद आयुषी का व्यवहार पूरी तरह बदल गया था और वह अपनी मां के बजाय अपने ताऊ मोहन स्वरूप के साथ रहने लगी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि आयुषी पहले भी अपनी मां के साथ मारपीट कर चुकी थी।
राकेश शर्मा ने अब अपने जीजा विजय वशिष्ठ की मौत की भी दोबारा जांच कराने और इस संबंध में अलग से एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उनका आरोप है कि ब्रेन हेमरेज के दौरान विजय वशिष्ठ को समय से पहले अस्पताल से घर लाया गया था, जिसके बाद संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई थी।
7 लाख में दी थी सुपारी, 7 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार आयुषी, उसके ताऊ मोहन स्वरूप और उसके बेटे बलराम उर्फ रवि ने भरतपुर निवासी हेमंत शर्मा से सात लाख रुपये में नीरज शर्मा की हत्या का सौदा किया था। आरोपियों ने पहले मां की रेकी की, वाहन किराये पर लिया और करीब एक महीने तक योजना बनाने के बाद 3 जुलाई को वारदात को अंजाम दिया। इस मामले में पुलिस अब तक आयुषी शर्मा, मोहन स्वरूप, हेमंत शर्मा, आकाश शर्मा, मोहित शर्मा, अरविंद शर्मा और रोहित जाटव सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं मुख्य आरोपी बलराम उर्फ रवि अभी फरार है। पुलिस फरार आरोपी की तलाश के साथ-साथ कथित तांत्रिक कनेक्शन और हत्या की साजिश के हर पहलू की जांच कर रही है।