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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट जज पर जस्टिस मेहता के गंभीर सवाल, CJI को लिखा चौथा पत्र, गोपनीयता भंग का आरोप

Tue, 08 Sep 2026 10:45 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान हाईकोर्ट में जजों के बीच आरोपों का मामला फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने CJI को चौथा पत्र भेजकर जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर आंतरिक न्यायिक जांच में हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान हाईकोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को फिर से पत्र लिखा है। यह जस्टिस मेहता का इस मामले में CJI को भेजा गया चौथा पत्र है। इसमें उन्होंने जस्टिस शर्मा पर अपनी प्रशासनिक शक्तियों का कथित दुरुपयोग करते हुए एक आंतरिक न्यायिक जांच में हस्तक्षेप करने और जांच की गोपनीयता भंग करने का आरोप लगाया है।

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पहले भी तीन पत्र लिख चुके हैं जस्टिस मेहता
जस्टिस संदीप मेहता ने इससे पहले 2, 10 और 17 अगस्त को CJI को पत्र लिखे थे। इन पत्रों में उन्होंने उस समय राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा पर कथित कुप्रबंधन, अनियमितताओं, भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोप लगाए थे। जस्टिस शर्मा ने इन आरोपों को निराधार बताया था। जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में राजस्थान हाईकोर्ट के लिए नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति और जस्टिस शर्मा के तबादले की मांग भी की थी। इसी बीच 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी।

न्यायिक जांच में हस्तक्षेप का आरोप
30 अगस्त को लिखे अपने चौथे पत्र में जस्टिस मेहता ने दावा किया कि उनके पास जस्टिस शर्मा के कथित मनमाने, संदिग्ध और प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग से जुड़े अतिरिक्त तथ्य और सामग्री हैं। उन्होंने हाईकोर्ट की एक शिकायत समिति का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ चल रही आंतरिक जांच में जस्टिस शर्मा ने सीधे हस्तक्षेप किया। इस न्यायिक अधिकारी पर अपनी एक महिला सहकर्मी की आपत्तिजनक तस्वीरें मोबाइल फोन पर दिखाने का आरोप था।
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जस्टिस मेहता के अनुसार शिकायत समिति के 21 मई और 9 जुलाई के दो प्रस्तावों में दर्ज किया गया कि तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने जांच की कार्रवाई में सीधे हस्तक्षेप किया। उनके मुताबिक समिति ने माना कि इस हस्तक्षेप से जांच की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है और पूरी जांच प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।

जांच की गोपनीयता भंग करने का भी आरोप
जस्टिस मेहता ने अपने पत्र में यह भी दावा किया कि समिति ने पाया कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की ओर से समिति के रिकॉर्ड रजिस्ट्री के अन्य अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों के साथ साझा किए गए। उन्होंने इसे संवेदनशील न्यायिक जांच की गोपनीयता का उल्लंघन बताया। जस्टिस मेहता के मुताबिक तीन महिला जजों वाली शिकायत समिति ने इस संबंध में अपने रिकॉर्ड में आपत्तियां दर्ज कीं और इसके बाद जांच को आगे नहीं बढ़ाया।
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CJI ने कहा था- निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए
इस मामले में CJI सूर्यकांत ने 26 अगस्त को कहा था कि जस्टिस मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर सार्वजनिक मंच पर फैसला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा था कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित जज को निष्पक्ष अवसर दिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि जस्टिस शर्मा 26 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। इससे पहले उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर जस्टिस मेहता के लगातार पत्रों ने न्यायिक हलकों में इस मामले को चर्चा में ला दिया है।

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