राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा का परचम फहराने के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने अब लोकसभा चुनाव में अपने घर के आंगन में कमल खिलाने की चुनौती है।
उनकी ससुराल यानी करौली धौलपुर लोकसभा सीट पिछली बार कांग्रेस के कब्जे में रही थी तो विधान सभा चुनाव में चली भगवा लहर भी यहां आकर वसुंधरा का साथ छोड़ गई थी।
पांच विधान सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा किया था। अब धौलपुर रियासत की बहू के सामने बड़ी चुनौती यह सीट है।
सबके अपने दांव
इस सीट पर भाजपा ने फिर से 2009 लोकसभा चुनाव में करीब तीस हजार मतों से पराजित हुए डॉ. मनोज राजौरिया पर दांव खेला है।
वहीं, कांग्रेस ने वर्तमान सांसद खिलाड़ी लाल बैरवा के स्थान पर नए चेहरे लक्खीराम को टिकट दिया। संगठनात्मक स्तर पर कांग्रेस गुटों में बंटी है। जो पार्टी प्रत्याशी के लिए मुश्किलें खड़ा कर सकता है।
वर्तमान सांसद बैरवा का टिकट कटने के पीछे इसी गुटबाजी को जिम्मेदार माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में मात्र दो सीटों पर सिमटने के बाद वसुंधरा राजे ने अपने सिपहसालारों को साफ संकेत दिए हैं कि आपसी गुटबाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कम ही रहा था जीत का अंतर
करौली-धौलपुर सीट पर वर्तमान में कांग्रेस के खिलाड़ी लाल बैरवा सांसद हैं। 2009 के चुनाव में खिलाड़ी लाल बैरवा ने भाजपा के डॉ. मनोज राजौरिया को पराजित किया था।
तब बैरवा को दो लाख 15 हजार 810 और भाजपा के डा. राजौरिया को एक लाख 86 हजार 87 वोट मिले थे। जीत का अंतर 29 हजार 723 मत रहा था।
करौली-धौलपुर संसदीय क्षेत्र में कुल आठ विधान सभा क्षेत्र शामिल किए गए हैं। इनमें करौली और धौलपुर के चार-चार विधान सभा क्षेत्र शामिल हैं। इनमें से पांच विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस, दो में भाजपा और एक में बसपा के विधायक हैं।