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राजस्थान में दुर्घटनाग्रस्त हुआ वायुसेना का मिग-21 विमान, पायलट सुरक्षित

Fri, 08 Mar 2019 03:40 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर

सार

  • यह फाइटर जेट सोवियत जेट का एक अपग्रेडेड संस्करण है।
  • मिग-21 बाइसन शॉर्ट रेंज और मीडियम रेंज एयरक्राफ्ट मिसाइलों से हमला करने में सक्षम है।
  • अपग्रेड होने के बाद यह पाकिस्तानी एफ-16 जैसे फाइटर जेट को टक्कर दे सकता है।
  • पाकिस्तान के साथ हुए 1971 और 1999 के कारगिल युद्ध में भी मिग-21 ने अहम भूमिका निभाई थी।
  • मिग-21 बाइसन ने वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी फाइटर विमानों के छक्के छुड़ा दिए थे।
  • भारतीय वायुसेना ने साल 2013 में मिग-21 के 50 साल पूरे होने का जश्न मनाया था।
  • हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 1967 में सोवियत संघ से मिग-21 बनाने का लाइसेंस मिला था।
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मिग-21 विमान (फाइल फोटो)
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विस्तार
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राजस्थान के बीकानेर जिले में शुक्रवार को वायुसेना का एक लड़ाकू विमान मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि पायलट विमान से सुरक्षित कूद गया। सेना के प्रवक्ता सोंबित घोष के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त लड़ाकू विमान मिग-21 बीकानेर के वायुसेना के नाल हवाई अड्डे से नियमित उड़ान भरने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

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उन्होंने बताया कि दुर्घटना के कारणों की जांच के लिये कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की जा रही है। बीकानेर के पुलिस अधीक्षक प्रदीप मोहन शर्मा ने बताया कि वायुसेना का लड़ाकू विमान मिग-21 बीकानेर से लगभग 12 किलोमीटर दूर शोभासर की ढाणी के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। पुलिस दल घटनास्थल के लिए रवाना हो गया है। इस दुर्घटना में अभी तक किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।


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40 साल पहले रिटायरमेंट की उम्र पार कर चुका है भारतीय वायुसेना का 'उड़ता ताबूत'

1964 में मिग-21 को भारतीय वायुसेना में प्रथम सुपरसोनिक लड़ाकू जेट के रूप में शामिल किया गया था । 1971 में भारत-पाकिस्तान के युद्ध और कारगिल युद्ध में इस लड़ाकू विमान ने अहम भूमिका निभाई थी। यह विमान तीसरी पीढ़ी का जेट एयरक्राफ्ट है।

सिंगल सीट का यह लड़ाकू विमान अधिकतम 2175 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से उड़ान भरता है और 16.8 किलोमीटर की अधिकतम ऊंचाई तक जा सकता है। यह अधिकतम चार शक्तिशाली बम, रॉकेट और हवा में मार मरने वाली मिसाइल व गन ले जा सकता है।

फिलहाल भारतीय वायुसेना में 113 मिग-21 हैं और साल 1963 के बाद से 1,200 से अधिक मिग लड़ाकू विमानों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया है। एक जनवरी, 2019 को लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय वायुसेना में अभी भी 31 लड़ाकू स्क्वाड्रन चालू हैं।

पिछले 40 वर्षों में, भारत ने 872 विमानों के अपने मिग लड़ाकू बेड़े के आधे से अधिक विमानों को खो दिया है। पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी ने कहा कि 840 हवाई जहाजों में से आधे से अधिक दुर्घटनाओं का सामना साल 1966 और साल 1984 के बीच किया गया था। 19 अप्रैल 2012 तक 482 मिग विमान दुर्घटनाएं हुई थीं।

साल 1971 और साल 2012 के बीच प्रति वर्ष औसतन 12 दुर्घटनाएं हुईं। इन विमानों को 1980 के दशक के मध्य तक रिटायर हो जाना था, लेकिन एक आधुनिक मल्टी-मोडर रडार, बेहतर एवियोनिक्स और संचार प्रणालियों के साथ आधुनिक लड़ाकू जेट बाइसन मानक में अपग्रेड किए गए।
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