आईआईटी जोधपुर में ऐसा स्मार्ट एआई असिस्टेंट विकसित करने पर शोध हो रहा है, जो टेक्स्ट, तस्वीर, आवाज, दस्तावेज और सेंसर डेटा को एक साथ समझ सकेगा। खास बात यह है कि इसे कम संसाधनों और बिना लगातार इंटरनेट कनेक्शन के भी चलाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में विशेष शोध चल रहा है। इस शोध के तहत कम संसाधनों में चलने वाले ऐसे स्मार्ट एआई असिस्टेंट विकसित किए जा रहे हैं, जो तस्वीर, टेक्स्ट, दस्तावेज, आवाज और सेंसर डेटा जैसी विविध जानकारियों को एक साथ समझ सकते हैं। इसका मुख्य मकसद अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली सूचनाओं को समझकर विभिन्न कार्यों में उपयोगी सहायता प्रदान करना है।
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स्वास्थ्य और उद्योग में बदल सकती है तस्वीर
स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह प्रणाली मेडिकल इमेज, डॉक्टर की रिपोर्ट और मरीज से जुड़े विवरणों को एक साथ देखकर चिकित्सकों की मदद कर सकती है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और मुख्य रूप से रेडियोलॉजिस्ट की सीमित उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए यह तकनीक बहुत सहायक सिद्ध हो सकती है। इसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्र में मशीनों की तस्वीरों, सेंसर डेटा, मशीन लॉग और तकनीकी मैनुअल का एक साथ विश्लेषण किया जा सकता है। इससे मशीनों में आने वाली खराबी का समय से पहले पता लगाने, गुणवत्ता जांचने और उत्पादन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
शिक्षा में भी बड़ा उपयोग संभव
शिक्षा और शोध के क्षेत्र में यह एआई असिस्टेंट अनुसंधान पत्रों, दस्तावेजों और अध्ययन सामग्री को समझने तथा उनसे महत्वपूर्ण जानकारी निकालने में मदद कर सकता है। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) 2024-25 के अनुसार देश में 24.69 करोड़ विद्यार्थी, 14.71 लाख स्कूल और 1.01 करोड़ शिक्षक हैं। वहीं उच्च शिक्षा में भी लगभग 4.46 करोड़ विद्यार्थी हैं। इतने बड़े शिक्षा तंत्र में यह तकनीक व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार सीखने और अकादमिक सहायता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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छोटा मॉडल, कम संसाधनों में काम
यह शोध कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिव्या सक्सेना के नेतृत्व में किया जा रहा है। शोध का एक महत्वपूर्ण मकसद एआई मॉडल को छोटा, तेज और कम संसाधनों में चलने योग्य बनाना है। महंगे कंप्यूटिंग संसाधनों और लगातार इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भर रहने के बजाय इस एआई प्रणाली को स्थानीय स्तर पर अस्पतालों, फैक्ट्रियों या कम इंटरनेट सुविधा वाले ग्रामीण क्षेत्रों में भी चलाया जा सकेगा।
डॉ. दिव्या के अनुसार यह शोध तीन आपस में जुड़े क्षेत्रों पर आधारित है, जिनमें मल्टीमॉडल लर्निंग एआई, एफिशिएंट एआई और एआई एजेंट शामिल हैं। इसका लक्ष्य एआई को केवल सवालों के उत्तर देने तक सीमित रखने के बजाय उपलब्ध जानकारी, टूल्स और संदर्भ को आपस में जोड़कर वास्तविक जीवन के कार्यों को पूरा करने में सहायता देना है।