पुलिस गिरफ्त में चारों आरोपी।
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जानकारी के अनुसार साल 2015 में शालू और महेश की शादी हुई थी। दो साल बाद 2017 में शालू ने एक बेटी को जन्म दिया। इसके कुछ समय बाद दोनों अलग हो गए। पांच साल अलग रहने के बाद महेश ने पत्नी से एक बार फिर नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दिया। वह पत्नी का बीमा करवाकर उसकी हत्या के हादसे में तब्दील कर क्लेम लेना चाहता था। अपनी योजना को सफल बनाने के लिए महेश शालू से फोन पर बात करने लगा। अप्रैल में वह उसके घर गया और उससे कहा कि तुम्हें जल्दी ही साथ लेकर चलूंगा, फिर हम मिलकर रहेंगे।
शालू से नजदीकियां बढ़ने के बाद आरोपी महेश ने मई में उसका बीमा करा दिया। इसकी शर्त थी कि अगर शालू की सड़क हादसे में मौत हो जाती है तो उसे 1.90 करोड़ रुपये मिलेंगे। योजना के तहत महेश ने शालू से कहा कि मैंने भगवान बालाजी से एक मन्नत मांगी हैं। मन्नत पूरी हो इसके लिए तुम्हें भगवान बालाजी के दर्शन करने के लिए लगातार बाइक पर जाना होगा। पूजा पूरी होने के बाद हम साथ में रहेंगे। इसके बाद से शालू बालाजी के दर्शन के लिए जाने लगी थी।
इधर, महेश ने एक अपने हिस्ट्रीशीटर दोस्त मुकेश को पत्नी शालू को मारने की सुपारी दे दी। 10 लाख रुपये में हत्या की बात तय हुई थी। आरोपी महेश ने 5.50 लाख एडवांस के रूप में दे दिए थे। 5 अक्टूबर को हिस्ट्रीशीटर मुकेश ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर शालू और उसके बुआ का लड़के राजू को टक्कर मार दी। दर्दनाक हादसे में शालू की मौके पर ही मौत हो गई थी। वहीं, उसके भाई राजू ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था।
पुलिस ने इस मामले में मृतका शालू के पति महेश चंद्र, सुपारी लेने वाले मुकेश सिंह राठौड़, राकेश कुमार बैरवा और सोनू सिंह को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने इससे पहले भी कई बार शालू को मारने की काशिश की थी। वह अल्टो कार से उसे टक्कर मारने चाहते थे, लेकिन फिर उन्हें लगा कि इससे वह बच न जाए। इसलिए उन्होंने प्रमोद नाम के युवक को भी अपने साथ शामिल कर लिया। पांच अक्टूबर को बदमाशों ने सफारी गाड़ी से शालू और राजू को टक्कर मार दी थी। पुलिस ने वारदात में शामिल चार आरोपियों को पकड़ लिया है। फरार चल रहे प्रमोद की तलाश की जा रही है।