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Rajasthan: संतों के सानिध्य में ऐतिहासिक डोल मेले का आगाज, संत लक्ष्मणदास बोले- आत्मा से आत्मा का मिलन है मेला

Wed, 03 Sep 2025 10:03 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर/बारां

सार

Sawai Madhopur News: मेलाध्यक्ष ममता नागर ने बताया कि इस बार मेले में कई नवाचार किए गए हैं। सांस्कृतिक विरासत को नए रूप में प्रस्तुत करने के साथ-साथ डोल तालाब के भरने से नौकायन का आनंद भी मिलेगा। पढ़ें पूरी खबर...।
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संत लक्ष्मणदास ने किया डोल मेले का उद्घाटन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आत्मिक ऊर्जा, धार्मिक आस्था और लोक परंपराओं का संगम माने जाने वाले ऐतिहासिक डोल मेले का शुभारंभ बुधवार को संतों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुआ। परंपरा के अनुसार सवाई माधोपुर जिले के पुराने शहर स्थित रैगर मोहल्ला रामदेव मंदिर से विशाल डोला यात्रा निकाली गई, वहीं हाड़ौती अंचल के बारां में जलझूलनी एकादशी पर डोल मेले की औपचारिक शुरुआत संत समाज द्वारा की गई।

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परंपरा से जुड़ी डोला यात्रा
सवाई माधोपुर के रैगर मोहल्ला स्थित बाबा रामदेव मंदिर से भव्य डोला यात्रा विधि-विधान और श्रद्धा के साथ निकाली गई। इंद्रदेव की हल्की बारिश के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु नाचते-गाते यात्रा में शामिल हुए। यात्रा मिर्जा मोहल्ला और मुख्य बाजार से होती हुई गलता मंदिर पहुंची, जहां भगवान का जल बिहार करवाया गया। इसके बाद यात्रा पुनः रामदेव मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
 
सामाजिक कार्यकर्ता पुरुषोत्तम जोलिया ने बताया कि यह परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है और हर वर्ष डोला ग्यारस पर इस आयोजन को जीवित रखा जाता है।
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संत और नेताओं की भी रही मौजूदगी - फोटो : अमर उजाला
संतों के संदेश और मेले का महत्व
बारां में डोल मेले का उद्घाटन गणेश पूजन और ध्वजारोहण से हुआ। मुख्य अतिथि संत लक्ष्मणदास महाराज ने कहा कि आत्मा से आत्मा का मिलन ही मेला है। उन्होंने मेलार्थियों से इस आयोजन को सहेजने और संवारने का आह्वान किया।
 
वृंदावन से आए कोकिल पुष्प महाराज ने कहा कि या तो वृंदावन में रस बरसता है या फिर बारां में। मेले में बिछड़े लोगों का मिलन होता है। महंत परशावाले बाबा ने मेले की परंपरा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सबसे पहला मेला मिथिला में आयोजित हुआ था और तभी से यह परिपाटी समाज में जीवित है।

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मेले में बड़ी संख्या में शामिल हुए लोग - फोटो : अमर उजाला
नगर परिषद सभापति ज्योति पारस ने कहा कि सभी पार्षदों ने कंधे से कंधा मिलाकर मेले को सफल बनाने में योगदान दिया है। मेलाध्यक्ष ममता नागर ने बताया कि इस बार मेले में कई नवाचार किए गए हैं। सांस्कृतिक विरासत को नए रूप में प्रस्तुत करने के साथ-साथ डोल तालाब के भरने से नौकायन का आनंद भी मिलेगा। नगर आयुक्त मोतीशंकर नागर ने बताया कि मेले में झूला प्रांगण को आधुनिक रूप दिया गया है और यातायात समस्याओं को कम करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
 
सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजेगा मेला
डोल मेले के रंगमंच पर गुरुवार रात भजन संध्या का आयोजन होगा। मेलाध्यक्ष ममता नागर ने आमजन से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस सांस्कृतिक आयोजन का आनंद लेने की अपील की है।

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