राजस्थान हाइकोर्ट ने जिला कलेक्टर की शक्तियां पुलिस आयुक्त को स्थानान्तरित करने के नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पर सवाल उठाया है।
न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश राजू पंडित की ओर से उसके भाई के जरिए पेश बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने 4 जनवरी 2011 को महानगर क्षेत्र में जिला मजिस्ट्रेट की 25 शक्तियों को पुलिस आयुक्त को स्थानान्तरित किया गया। इसमें पासा अधिनियम भी शामिल है। याचिका में कहा गया कि पुलिस कमिश्नर को पहले कार्यपालक मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्ति देने के बाद ही जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियां स्थानान्तरित की जा सकती है, लेकिन 4 जनवरी की अधिसूचना से जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियां सीधे ही पुलिस कमिश्नर को सौंप दी गई।
याचिकाकर्ता के खिलाफ आखिरी आपराधिक मामला फरवरी 2014 में दर्ज हुआ था। पुलिस कमिश्नर ने गत 28 सितंबर को मशीनी अंदाज में आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को पासा अधिनियम के तहत एक साल के लिए जेल में निरूद्ध कर दिया। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को तत्काल जेल से रिहा करने के आदेश देते हुए इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश को रद्द कर दिया है।