पाकिस्तान की ओर से राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में टिड्डी दल आ धमका है। इन कीटों को रोकने के लिए राजस्थान सरकार ने करीब हजार हेक्टेयर सीमावर्ती क्षेत्रों में कीटनाशक का छिड़काव कर दिया है और पशुपालकों को छिड़काव क्षेत्र में पशु नहीं चराने की हिदायत भी जारी कर दी है। हालांकि फसलें नहीं होने के कारण नुकसान होने की आशंका नहीं है, लेकिन अमरूद, आंवला, बेर आदि के बाग मालिकों को चिंता सता रही है।
कुछ क्षेत्रों में बाजरे व ग्वार की बुवाई हो चुकी है और अन्य में जारी है। प्रशासन का मानना है कि 15 से 20 दिनों तक टिड्डियों का प्रकोप रहेगा। यदि समय पर नहीं रोका तो बुवाई से उपजने वाली पौध को नुकसान पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अनुसार कृषि सहित संबंधित विभागों को केंद्र सरकार से संपर्क में रहने को कह दिया गया है और किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सभी उपाय किए जा रहे हैं।
केंद्रीय टिड्डी नियंत्रण विभाग की टीम और प्रदेश की कृषि विभाग की टीमें टिड्डी दल के प्रकोप से निपटने के लिए जुट गई हैं। कीटनाशकों का तेजी से छिड़काव किया जा रहा है। कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. अतर सिंह मीणा ने बताया कि फिलहाल फसलें नहीं होने के कारण स्थिति नियंत्रण में है।
राजस्थान के कृषि विभाग में संयुक्त निदेशक डॉ. सुआलाल जाट के अनुसार टिड्डी दल हवा के साथ एक दिन में 150 किलोमीटर तक का सफर करता है और हरे पेड़-पौधों को शिकार बनाता है। राजस्थान में इससे पूर्व वर्ष 1993 व 1998 में टिड्डी दलों ने किसानों को खासा नुकसान पहुंचाया था।