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गहलोत बोले; ज्ञानेश कुमार को जेल भेजना चाहिए, सीएम के लिए कहा- भला आदमी समझता था, राजस्थान को बर्बाद कर दिया

Wed, 23 Sep 2026 08:08 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जेल भेजने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्पक्षता खत्म हो चुकी है और निकाय चुनावों में अफसरों ने IAS-IPS की साख धूमिल की।
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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
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विस्तार
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 पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। जयपुर स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में गहलोत ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल बर्खास्त करने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों की ओर से फैसलों पर आपत्ति जताए जाने के बाद आयोग की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवाल और गंभीर हो गए हैं।
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गहलोत ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को चुनाव आयुक्तों की चयन समिति से बाहर करने के लिए कानून में बदलाव किया गया। उन्होंने ईडी, इनकम टैक्स और सीबीआई के बाद चुनाव आयोग पर भी सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। गहलोत ने कहा कि लोगों का चुनावी प्रक्रिया से भरोसा उठ रहा है और बैलेट पेपर से मतदान की मांग सामने आ रही है।

निकाय चुनावों में परिसीमन पर सवाल

राजस्थान के हालिया नगर निकाय चुनावों को लेकर भी गहलोत ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि असम की तर्ज पर राजस्थान में भी एकतरफा परिसीमन किया गया और जयपुर, जोधपुर सहित कई शहरों में वार्डों के पुनर्गठन से भाजपा को फायदा पहुंचा।
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गहलोत ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस के वोट शेयर में अंतर महज **0.94 प्रतिशत** रहा। उपलब्ध चुनाव आंकड़ों के अनुसार भाजपा को करीब 35.19 प्रतिशत और कांग्रेस को 34.25 प्रतिशत वोट मिले, जबकि वार्डों की संख्या में दोनों दलों के बीच बड़ा अंतर रहा।

जोधपुर का उदाहरण देते हुए गहलोत ने परिसीमन पर सवाल उठाया। उनके मुताबिक, कांग्रेस और भाजपा को वहां 44-44 वार्ड मिले, जबकि कांग्रेस को भाजपा से अधिक वोट मिले थे। इन दावों को लेकर गहलोत ने चुनावी प्रक्रिया और परिसीमन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।

अफसरों पर भी साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री ने निकाय चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी के कथित इस्तेमाल को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सरकार के दबाव में काम करते हुए आईएएस और आईपीएस कैडर की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।

गहलोत ने पार्षदों की खरीद-फरोख्त, धनबल, धमकियों, पुराने मामलों को फिर से खोलने और हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश की पुलिस के कथित इस्तेमाल जैसे आरोप भी लगाए। हालांकि ये आरोप गहलोत की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्टों में नहीं हुई है।

'एकदलीय शासन' की आशंका जताई

गहलोत ने परिसीमन और चुनावी प्रक्रिया को लेकर देश में एकदलीय शासन की आशंका भी जताई। उन्होंने कहा कि सीटों के परिसीमन के जरिए राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने चीन, रूस और उत्तर कोरिया का उदाहरण देते हुए केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया।

गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और अब आयोग के भीतर से सामने आई आपत्तियों ने उन सवालों को और चर्चा में ला दिया है। निकाय चुनावों के नतीजों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा ने 4,179 वार्ड, कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीते। वोट शेयर में दोनों प्रमुख दलों के बीच अंतर 0.94 प्रतिशत रहा।
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