आयुर्वेदिक दवाओं के जरिए मिर्गी के इलाज का दावा करने वाले ऋषिकेश के एक डॉक्टर को अपनी लापरवाही का अंजाम भुगतना पड़ा।
झूठ दावे और इलाज में लापरवाही के चलते सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टर को तीन माह में रोगी को 15 लाख रूपए का हर्जाना देने का आदेश दिया है। रोगी की मां पिछले 15 साल से डॉक्टर के खिलाफ कानूनी लड़ रही थीं।
कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि डॉक्टर के गुमराह करने वाले विज्ञापन, अनफेयर ट्रेड प्रेक्टिस और लापरवाही के कारण बेटे और उसकी मां को मानसिक-शारीरिक परेशानी उठानी पड़ी है।
रोगी की मां भीलवाड़ा निवासी भंवरकंवर जैन ने ऋषिकेश के डॉक्टर आर के गुप्ता से अपने बेटे का इलाज कराया था। इलाज में धोखाधड़ी के बाद उन्होंने डॉक्टर के खिलाफ शिकायत की।
इस मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम ने चार वर्ष पहले ही ढाई लाख रुपए जुर्माना देने का आदेश दिया था। इस पर डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
आयुर्वेद की जगह एलोपैथिक दवाई
भंवरकंवर जैन ने बेटे के मिर्गी के इलाज के लिए विज्ञापन के जरिए ऋषिकेश में नीरज क्लिनिक प्राइवेट लिमिटेड के डॉक्टर आरके गुप्ता से संपर्क किया। तब डॉक्टर ने उसे आयुर्वेद दवाइयों से पूरी तरह ठीक करने का दावा किया।
मां का आरोप है कि गुप्ता से इलाज शुरू होने के बाद बेटे की हालत बिगड़ गई। तीन साल तक इलाज के बाद पता चला कि उसे आयुर्वेदिक की जगह एलोपैथिक दवाइयां दी जा रही थी। अब उनके बेटे का रोग लाइलाज हो गया है।