Kota Municipal Corporation: कोटा नगर निकाय चुनाव में 9 और 11 सितंबर को मतदान होगा, जबकि 14 सितंबर को परिणाम आएंगे। नगर निगम के 100 वार्डों में 8.24 लाख मतदाता मतदान करेंगे। मेयर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने राजस्थान में नगर निकाय चुनाव का शेड्यूल जारी कर दिया है। इसके तहत कोटा जिले में दो चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण में नगर पालिका रामगंजमंडी, सुकेत, सांगोद, इटावा और सुल्तानपुर में 9 सितंबर को मतदान होगा। वहीं, कोटा नगर निगम के 100 वार्डों के लिए 11 सितंबर को मतदान कराया जाएगा। सभी चुनावों के परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे। इसके बाद मेयर, नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव 21 सितंबर को होगा। वहीं, नगर निकायों के उपाध्यक्ष और उपमहापौर का चुनाव 22 सितंबर को कराया जाएगा।
कोटा शहर में कितने वार्ड?
हाल ही में कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण नगर निगम का कार्यकाल समाप्त हुआ है। दोनों निगमों में कांग्रेस का बोर्ड था। कोटा उत्तर में महिला मेयर पद पर थी। परिसीमन के बाद अब कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण नगर निगम को एक कर दिया गया है। नए कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड होंगे।
पढे़ं: निकाय चुनाव से पहले अजमेर भाजपा में सियासी भूचाल, पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत ने छोड़ी पार्टी
आरक्षित सीटों का हाल?
पिछले नगर निगम चुनाव में कोटा उत्तर में भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी का असर साफ दिखाई दिया था। 70 वार्डों में भाजपा सिर्फ 14 सीटें जीत सकी थी, जबकि कांग्रेस ने 47 सीटों पर कब्जा किया था। 8 वार्डों में निर्दलीय और एक वार्ड में अन्य प्रत्याशी विजयी रहा था। कांग्रेस ने बहुमत के साथ कोटा उत्तर में अपना बोर्ड बनाया था। वहीं, कोटा दक्षिण के 80 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 36-36 सीटें मिली थीं, जबकि 8 निर्दलीय पार्षद चुने गए थे। क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस ने यहां भी अपना बोर्ड बना लिया था।
समीकरण कैसा?
नगर निकाय चुनाव में इस बार बीजेपी और कांग्रेस, दोनों के लिए ही मुकाबला आसान नहीं होगा। जहां एक ओर कोटा दक्षिण क्षेत्र बीजेपी का गढ़ माना जाता है, वहीं कोटा उत्तर में कांग्रेस अधिकतर सीटों पर जीत हासिल करती आई है। लेकिन बीजेपी के दिग्गज नेता रहे प्रहलाद गुंजल के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब कोटा उत्तर में बीजेपी के पास कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आ रहा है। वहीं, कोटा उत्तर में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल की पकड़ हमेशा से मजबूत रही है। हालांकि, एक नगर निगम होने के बाद अब सभी की निगाहें कोटा दक्षिण पर टिकी हैं। यहां बीजेपी एक ओर चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगाएगी, वहीं प्रहलाद गुंजल बीजेपी के चुनावी समीकरण को बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं।
राजनीतिक जानकार क्या कहते हैं?