समलैंगिक विवाह भारतीय संस्कृति खिलाफ है। यह कहते हुए गुरुवार को दुर्गा वाहिनी संगठन के बैनर तले मातृशक्ति ने विरोध स्वरूप दौसा कलेक्ट्रेट में सीजेआई और भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा है।
दुर्गा वाहिनी ने दौसा कलेक्ट्रेट पर ज्ञापन देकर कहा कि समलैंगिक विवाह की बात करना हमारी संस्कृति पर आघात है। दुर्गा वाहिनी समूह की संयोजिका पुष्पा डंगायच ने कहा कि समलैंगिक विवाह भारतीय विवाह संस्कार पर आघात है। भारत में विवाह दो व्यक्ति और दो परिवारों के बीच एक सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक मिलन है।
समलैंगिक और नकारात्मक परिणाम देते हैं- दुर्गावाहिनी
दुर्गा वाहिनी ने कहा कि समलैंगिक विवाह के अनेक नकारात्मक प्रभाव हैं। इसे मान्यता देने से सांस्कृतिक मूल्यों का हनन होगा। समूह में उपस्थित एडवोकेट रेनू चौधरी ने कहा कि भारत के सामाजिक ढांचे में विवाह एक पवित्र संस्कार है और उसका उद्देश्य मानव जाति का उत्थान है। इसमें पुरुष और महिला के मध्य ही विवाह को मान्यता दी गई है। ज्ञापन के समय मौजूद महिलाओं का कहना था कि यदि समलैंगिक विवाह को मान्यता मिली, तो यह भारत की संस्कृति को समाप्त करेगा और भारत में जिस प्रकार से सामाजिक ताना-बाना है, उस ताने-बाने और सभी संबंधों पर कुठाराघात करेगा और जो हमारी सामाजिक व्यवस्था पूरे विश्व में प्रचलित है, वह पाश्चात्य करण की तरफ चली जाएगी। हमारी मानवता और संस्कार नष्ट हो जाएंगे।