साल में एक या दो भर्ती युवाओं के लिए बड़ी चुनौती
अमर उजाला की चर्चा के दौरान युवाओं से यहां की शिक्षा की स्थिति पर सवाल किया गया तो युवाओं ने रोजगार का दुखड़ा रोया। युवाओं ने कहा कि रोजगार के नाम पर यहां कुछ है नहीं। भर्ती आती है वो भी साल एक या दो। सरकार जो भर्ती निकालती है तो पेपर लीक हो जाते हैं। यहां का युवा तो सरकारी नौकरी पर ही निर्भर है, प्राइवेट सेक्टर तो यहां है ही नहीं। प्राइवेट सेक्टर के नाम पर बस फाइनेंस लाइन बची है तो उसमें भी तनख्वाह ही नहीं है। पढ़ाई की बात तो यहां है ही नहीं तैयारी के नाम पर बस आर्मी की तैयारी ही कर रहे युवा।
सबको नहीं मिल सकती सरकारी नौकरी, प्राइवेट में मिलता है दूसरा मौका
युवाओं ने कहा कि सरकारी नौकरी में तो कुछ लोगों का ही चयन होता है, बाकी तो खाल रह जाते हैं। अगर यहां भी प्राइवेट सेक्टर की नौकरी हों तो युवाओं को एक दूसरा मौका मिल सकता है। हर कोई तो सरकारी नौकरी नहीं पा सकता। यहां की महिला विधायक ही दो बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं हैं अगर वो चाहतीं तो यहां के लिए कुछ कर सकती थीं। वैसे तो सभी सरकारें एक जैसी ही हैं। किसी एक को क्या कहें।