धौलपुर में सरमथुरा डांग क्षेत्र के जंगल में बाघिन अपने तीन शावकों की सुरक्षा के लिए गुफा के बाहर लगातार पहरा दे रही है। रात के समय पानी की तलाश में थोड़े समय के लिए वह जंगल में तालाब पर जाती हैं। इसके बाद तुरंत वापस लौटकर शावकों के पास पहुंच जाती है। शावकों का पिता टाइगर टी-116 बाघिन और तीनों शावक बच्चों के खाने के लिए शिकार करके मांस का प्रबंध करता है।
डीएफओ किशोर कुमार गुप्ता ने बताया, लंबे समय से टाइगर टी-116 और मादा टी-117 विचरण कर रहे हैं। दोनों जोड़े में अगाध प्रेम है। उन्होंने बताया सरमथुरा क्षेत्र के झिरी, दमोह, बाड़ी क्षेत्र के रामसागर, बसई डांग क्षेत्र के सोने का गुर्जा और वन विहार में ये विचरण करते रहते हैं। उन्होंने बताया, एक महीने पूर्व बाघिन टी-117 ने तीन शावकों को जन्म दिया है, जिससे बीहड़ों में खुशी की किलकारियां गूंजी हैं। बाघिन और शावकों के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए टाइगर वॉच कैमरे लगाए गए थे।
उन्होंने बताया, कैमरे में बाघिन टी-117 की मनमोहक तस्वीर कैद हुई हैं। बाघिन तीनों शावकों को बेहद प्यार और दुलार करती है। बाघिन गुफा के अंदर तीनों बच्चों को रखती है। लगातार देखभाल के लिए बाहर पहरा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया, शावकों के पिता टी-116 द्वारा दिन में भोजन का प्रबंध किया जाता है।
पैंथर, भालू, सियार, लकड़बग्घा, जंगली जानवरों पर बाघ-बाघिन की नज़र...
बाघिन की शावकों के साथ प्यार और दुलार करने की रोमांचित तस्वीरें वन विभाग के कैमरे में कैद हुई हैं। उन्होंने बताया, शावकों को खतरे से बचाने के लिए बाघ-बाघिन दोनों की पैंथर, भालू समेत अन्य जानवरों पर भी नजर रखी जा रही है।
साल 2021 में भी दो शावकों को दिया था जन्म...
इससे पहले साल 2021 में भी टी-117 ने दो शावकों को जन्म दिया था। जिले के डांग क्षेत्र एवं चंबल के बीहड़ों में टाइगरों का कुनबा लगातर बढ़ने से वन्यजीव प्रेमियों में भारी खुशी देखी जा रही है। उन्होंने बताया, राज्य सरकार ने करौली-धौलपुर रिजर्व सेंचुरी एरिया बनाने की कवायद शुरू कर दी है। करौली और धौलपुर के जंगलों में लगातार टाइगरों का मूवमेंट बना रहता है। कभी-कभी टाइगर और पैंथर्स में वर्चस्व की लड़ाई को लेकर फाइट भी हुई है। नवंबर 2022 में टाइगर ने वर्चस्व की लड़ाई में पैंथर का शिकार भी किया था।
दो साल तक करेगी शावकों की देखभाल...
वन विभाग के डीएफओ किशोर कुमार गुप्ता ने बताया, जन्म देने के बाद बाघिन दो साल तक शावकों की देखभाल और परवरिश करती हैं। डेढ़ साल के बाद बच्चों को आपदा एवं मुसीबत के समय मुकाबला करने के करतब सिखाती है। सेल्फ डिफेंस होने के बाद शावकों को दो साल बाद स्वतंत्र तरीके से जंगल में छोड़ देती है।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा...
धौलपुर जिले की डांग और चंबल के बीहड़ों में टाइगर का कुनबा बढ़ने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। जिले का राम सागर, तालाब शाही, दमोह क्षेत्र पहले से ही पर्यटन क्षेत्र घोषित किया हुआ है। देश के कोने-कोने से सैलानी और वन्य जीव प्रेमी भ्रमण करने पहुंचते हैं। डीएफओ किशोर कुमार गुप्ता का कहना है कि धौलपुर जिले में पर्यटन की प्रबल संभावनाएं हैं। वन विभाग द्वारा पशु-पक्षी और वन्यजीवों पर नजर रखी जा रही है। वन क्षेत्र में कैमरे लगाकर टाइगर, भालू और अन्य जानवरों का मूवमेंट देखा जाता है।