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हिंदुओं के बारे में आरएसएस की मौजूदा सोच सावरकर से बिल्कुल अलग: धारीवाल

Tue, 23 Jul 2019 08:23 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media
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राजस्थान के संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने कहा है कि हिंदुओं को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की मौजूदा सोच इस संगठन के विचारक दामोदर सावरकर की उस राय से बिलकुल विपरीत है जिसकी व्याख्या उन्होंने अपनी किताब में की थी। धारीवाल ने कहा कि यह वही सावरकर थे जिन्होंने कहा था कि ‘गाय को पूजने का कोई औचित्य नहीं है।'
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राष्ट्रवाद को लेकर भाजपा के सिद्धांत पर सवालिया निशान लगाते हुए धारीवाल ने कहा कि देश के करोड़ों मुसलमानों को साथ लिए बिना किसी को भी राष्ट्रवादी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि 'भारत के मुसलमान सर्वश्रेष्ठ मुसलमान हैं।’ पुलिस व जेल विभागों की अनुदान मांगों पर जवाब देते हुए धारीवाल ने सोमवार रात राज्य विधानसभा में कहा कि जब यह कहा जाता है कि हिंदुस्तान में रहना है तो हिंदू बनकर रहना होगा तो इससे समाज का वातावरण खराब होता है और जगह-जगह झगड़े होते हैं। हमें इस पर विचार करना चाहिए।

दामोदर सावरकर की किताब 'हिंदुत्व’ का जिक्र करते हुए धारीवाल ने कहा, ‘हिंदुत्व में, जो उनका ग्रंथ है, उसमें उन्होंने साफ लिखा है कि वह आदमी जिसका पुण्य भू और जिसका पितृ भू अगर इस देश का है तो वह हिंदू है। पुण्य भू का मतलब उसका तीर्थ स्थान यहां पर हो, उसका मंदिर यहां पर हो, उसका गुरुद्वारा उसका मठ यहां पर हो। उसके देवी देवता यहां पर हो। वहीं पितृ भू का मतलब है कि उसका खानदान, उसके मां बाप यहां जन्म लेते हैं तो वह हिंदू है।’ 

 

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