मंत्री महेश जोशी के साथ रोहित जोशी।
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राजस्थान सरकार में मंत्री महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने उसे दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के केस में कोई राहत नहीं दी है। रोहित ने पीड़िता द्वारा की गई एफआईआर को निरस्त करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसे बुधवार को कोर्ट ने निरस्त कर दिया। कोर्ट ने रोहित की गिरफ्तारी पर भी कोई रोक नहीं लगाई है।
दरअसल, 20 मई को रोहित जोशी की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है। याचिका में युवती पर रोहित को हनीट्रैप के तहत फंसाने का आरोप लगाया था। उसने कहा था कि अक्टूबर 2020 में युवती ने उसे सोशल मीडिया पर दोस्ती का प्रस्ताव भेजा था। जिसके बाद दोनों में दोस्ती हो गई। जनवरी 2021 से दोनों ने एक-दूसरे से मिलना शुरू किया। इसके बाद से लगातार संपर्क में रहे। पहली बार सवाई माधोपुर में आपसी सहमति से दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने थे।
रोहित ने याचिका में बताया, मैं अपनी पत्नी से तलाक लेकर युवती से शादी करना चाहता था। इसके लिए मैंने अपने पिता से भी बात की थी, लेकिन वह तैयार नहीं हुए। उसे नहीं पता था कि युवती उसे फंसा रही है। उसने याचिका में दिल्ली सदर बाजार थाने में दर्ज दुष्कर्म केस को रद्द करने की मांग की थी। बुधवार को हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए उसकी याचिका को निरस्त कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पीड़िता की ओर से इस केस को सीनियर एडवोकेट विकास पाहवा और कपिल सांखला लड़ रहे हैं। जबकि रोहित जोशी की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल माथुर, एडवोकेट निशांत कुमार और प्रीतम बिश्वास पैरवी कर रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 26 जुलाई को होगी।
अग्रिम जमानत याचिका की जाएगी दायर
रोहित जोशी फिलहाल फरार चल रहा है, दिल्ली पुलिस उसे अभी तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इधर, कोर्ट ने एफआईआर निरस्त करने की याचिका को निरस्त कर दिया है। ऐसे में अब रोहित के वकील अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर सकते हैं। उधर, दिल्ली पुलिस आरोपी रोहित की गिरफ्तारी के लिए एक साथ कई ठिकानों पर दबिश दे सकती है।