दौसा साइबर थाना और साइबर सेल ने 20.50 लाख रुपए की साइबर ठगी के मामले में दिल्ली में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का भांडाफोड़ किया है। इसके साथ ही पुलिस ने दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जो इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर लोगों को ठगते थे। गिरफ्तार आरोपी पहले 43 लाख रुपए की साइबर ठगी में पकड़े जा चुके हैं और अब तक कई लोगों को अपने जाल में फंसा चुके हैं।
एसबीआई कर्मचारी बन ठग ने किया फोन
जानकारी के अनुसार, 22 जनवरी को लालसोट के राजोली निवासी रेवडमल बैरवा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 2-3 महीने पहले उन्हें सौरभ अग्रवाल नामक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को दिल्ली हेड ऑफिस में एसबीआई इंश्योरेंस का कर्मचारी बताया। आरोपियों ने झांसा दिया कि उनके एसबीआई लाइफ पॉलिसी का पैसा शेयर मार्केट में बढ़कर 2,47,850 रुपए लैप्स होने वाला है। इसके बाद आरोपियों ने मुंबई हेड ऑफिस के फर्जी नामों का उपयोग कर रेवडमल को गुमराह किया।
मामले के खुलासे के लिए विशेष टीम गठित
आरोपियों ने एनओसी, सिल्वर, गोल्ड फाइल चार्ज, बीआरएल लेटर, टैक्स और स्टाम्प ड्यूटी के नाम पर रेवडमल बैरवा से कुल 20,50,998 रुपए विभिन्न फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। पुलिस ने आईटी एक्ट समेत कई धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। एसपी सागर राणा के निर्देश पर साइबर थाना इंचार्ज बृजेश कुमार और साइबर सेल प्रभारी प्रेमनारायण के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।
दो आरोपी गिरफ्तार
टीम के गठन के बाद पुलिस ने दिल्ली में एक फर्जी कॉल सेंटर का पता लगाकर दबिश दी और मौके से मुकेश कुमार (कुंदरकी भूड, अमरोहा), और जीत सिंह (शिव विहार, दिल्ली) को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 10 मोबाइल, 19 सिम कार्ड और लेपटॉप जब्त किए गए। टीम में साइबर थाना के कॉन्स्टेबल भाग सिंह और मुरारी लाल तथा साइबर सेल के जगमाल सिंह ने विशेष भूमिका निभाई।
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पुलिस ने आम लोगों से की अपील
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर इंश्योरेंस पॉलिसी, लॉटरी या लोन के नाम पर पैसा जमा न करें। बैंक या बीमा कंपनियां कभी भी फोन पर प्रक्रिया शुल्क के लिए व्यक्तिगत खातों में पैसा ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती हैं। किसी भी साइबर अपराध की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित हेल्पलाइन या साइबर थाना को सूचित करें।