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Dausa News: सात सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों ने किया सद्बुद्धि यज्ञ, 12 को प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान

Mon, 09 Feb 2026 11:03 AM IST
दौसा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

सार

राज्य सरकार की कथित अनदेखी से नाराज कर्मचारियों ने अपनी सात सूत्रीय मांगों को आगामी बजट में शामिल कराने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के बाहर सद्बुद्धि यज्ञ किया और 12 फरवरी को प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया। 
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दौसा जिला मुख्यालय पर यज्ञ करते कर्मचारी
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विस्तार
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राज्य सरकार की अनदेखी से आक्रोशित कर्मचारियों ने दौसा जिला मुख्यालय पर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर कलेक्ट्रेट के बाहर कर्मचारियों ने सद्बुद्धि यज्ञ कर सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आगामी बजट में उनकी सात सूत्रीय मांगों को शामिल नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज होगा।

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यज्ञ के माध्यम से कर्मचारियों ने 12 फरवरी को प्रदेशव्यापी एक दिवसीय हड़ताल व महारैली को सफल बनाने का संकल्प लिया। महासंघ के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि कर्मचारी संगठन पिछले एक वर्ष से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठा रहा है लेकिन सरकार लगातार उपेक्षा कर रही है। उन्होंने कहा कि यह यज्ञ सरकार को सद्बुद्धि देने और कर्मचारियों की जायज मांगों को बजट में शामिल कराने की अंतिम उम्मीद है। सद्बुद्धि यज्ञ का संचालन फार्मासिस्ट संघ के जिलाध्यक्ष पंडित द्वारकेश वशिष्ठ ने किया। मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति दी गई और सरकार से कर्मचारियों के हित में निर्णय लेने की कामना की गई।

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जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि 12 फरवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और मजदूर संगठनों के समर्थन में एक दिवसीय हड़ताल होगी। जिले के सभी कर्मचारी इस दिन व्यक्तिगत आकस्मिक अवकाश (सीएल) लेकर हड़ताल पर रहेंगे, जिससे सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहेगा। महासंघ के जिला मंत्री मुकेश चंद मीणा एचडी ने बताया कि जिन सात बड़ी मांगों को लेकर यह हवन किया गया, उनमें कर्मचारियों में पदोन्नति व वेतन विसंगति 8, 16, 24 और 32 वर्ष की सेवा पर चयनित वेतनमान लागू हो, केंद्र के समान पे-लेवल मिले, पुरानी पेंशन योजना को सुरक्षित किया जाए, पीएफआरडीए कानून रद्द कर 53 हजार करोड़ रुपए कर्मचारियों को लौटाए जाए, संविदा व मानदेय कार्मिकों को स्थाई किया जाए, पारदर्शी नीति लागू हो, तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले किए जाएं, विभागों, निगमों और बोर्डों के निजीकरण को बंद किया जाए, आठवां वेतन आयोग लागू किया जाए और बेरोजगारी, महंगाई और सांप्रदायिक नीतियों पर अंकुश लगाने जैसी मांगें शामिल है।

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