दौसा जिला मुख्यालय के आभानेरी में पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय आभानेरी फेस्टिवल का आयोजन किया गया। इस महोत्सव का उद्घाटन शुक्रवार को जिला कलेक्टर देवेंदर कुमार, विधायक भागचंद टाकड़ा और मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंदर कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
महोत्सव में लोक कलाकारों ने अपनी अद्भुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। नुक्कड़ नाटक, कच्छी घोड़ी नृत्य, बहरूपिया, कठपुतली, शहनाई वादन और कैमल सफारी जैसे कार्यक्रमों ने देशी और विदेशी पर्यटकों को खासा लुभाया। पद दंगल में स्थानीय कलाकारों ने पौराणिक रचनाओं की प्रस्तुति दी, जिससे दर्शक बेहद आनंदित हुए।
ये भी पढ़ें- Rajasthan : 'जीएसटी से जनता को लूटा, माफी मांगनी चाहिए'; पीएम मोदी के बांसवाड़ा दौरे पर कांग्रेस का हमला
स्थानीय दस्तकारों की नायाब कला ने पर्यटकों का ध्यान खींचा और कुम्हारी के सामान, लाख के चूड़े, मूर्ति कला और चर्म उत्पादों की खरीदारी ने महोत्सव को और भी खास बना दिया। राजस्थानी लोक संध्या में लोग देर रात तक उपस्थित रहे, जिससे महोत्सव का वातावरण जीवंत बना रहा।
देशी और विदेशी सैलानियों का परंपरागत तरीके से माला पहनाकर और तिलक लगाकर स्वागत किया गया। सैलानियों ने ग्राम भ्रमण के लिए कैमल कार्ट की सवारी की, जिसे सभी ने काफी पसंद किया। आभानेरी ग्राम में दसवीं शताब्दी का हर्षद माता मंदिर और विश्व विख्यात चांद बावड़ी सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बने। सवेरे-सवेरे से सैलानी ग्राम दर्शन, चांद बावड़ी और माता के मंदिर का दर्शन कर रहे थे, जबकि शाम को सात से नौ बजे तक आयोजित सांस्कृतिक संध्या ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
राजस्थानी रंग में रंगे सैलानियों ने वीर रस से भरपूर कच्छी घोड़ी नृत्य का आनंद लिया, जबकि बहरूपिया, कठपुतली कलाकारों और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने देशी-विदेशी पर्यटकों का मन मोह लिया। इस प्रकार आभानेरी महोत्सव ने पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को नए रंग और उत्साह से सजाया, जिससे यह आयोजन स्थानीय और विदेशी सैलानियों के लिए यादगार अनुभव बन गया।