दौसा जिला परिषद साधारण सभा की बैठक में जल जीवन मिशन कार्यक्रम में जमकर धांधली के आरोप-प्रत्यारोप लगे, जिसके बाद बात बढ़ते-बढ़ते तनातनी तक पहुंच गई। एक जिला परिषद सदस्य की ओर से जिला प्रमुख हीरालाल सैनी को पद से हटाए जाने की चेतावनी देने के साथ ही कांग्रेस और बीजेपी के सदस्य आमने-सामने हो गए, जिसके चलते बैठक में जमकर हंगामा हुआ।
बैठक में मौजूद जिला परिषद सदस्यों ने जिला परिषद सीईओ रामकिशोर मीणा के ऊपर आरोप लगाया कि सीईओ की शह पर अधिकारी कर्मचारी जनता की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। बैठक में मौजूद ज़्यादातर सदस्यों के माइक खराब मिले, तो सदस्य और भी गुस्सा हो गए।
जिला परिषद सदस्य पप्पू झूथाहेडा ने जिला प्रमुख हीरालाल सैनी को पद से हटाने की मांग उठाई...
जिला परिषद सदस्यों ने अधिकारियों पर अनदेखी के आरोप लगाए। यह बैठक जिला प्रमुख हीरालाल सैनी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। आरोप-प्रत्यारोप के बीच जिला परिषद सदस्य पप्पू झूथाहेडा ने जिला प्रमुख हीरालाल सैनी को पद से हटाए जाने की मांग उठा दी, जिसके बाद तमाम कांग्रेस जिला परिषद सदस्य एकजुट होकर भाजपाइयों से उलझते नजर आए। इसके बाद बैठक में माहौल गरमा गया। कांग्रेस और बीजेपी सहित निर्दलीय सदस्य भी आमने सामने हो गए। आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया।
सभी अधिकारियों को जबाव देने के लिए पाबंद किया जाएगा - सीईओ
उधर, जिला परिषद के सीईओ रामकिशोर मीणा ने सदस्यों को संतुष्ट करते हुए उनके कार्यों को प्राथमिकता देकर करवाने का भरोसा दिया। इस दौरान सदस्यों ने कहा कि अधिकांश अधिकारी उन्हे तबज्जो नहीं देते हैं। उनकी अनुशंसा पर कार्य नहीं किए जाते हैं। अधिकारी हमेशा टालमटोल करते हैं, जिसके कारण सदस्यों के अधिकांश काम रुके हुए हैं।
इस पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी रामकिशोर मीणा ने कहा कि सदस्यों के कार्य प्राथमिकता से किए जाएंगे। सभी अधिकारियों को जबाव देने के लिए पाबंद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी और कर्मचारी तय समय सीमा में सदस्यों को संतोषप्रद जवाब नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सदस्यों की हर समस्या का प्राथमिकता से समाधान किया जाएगा - ज़िला प्रमुख
इस मामले पर जिला प्रमुख हीरालाल सैनी ने कहा कि सदस्यों की हर समस्या का प्राथमिकता से समाधान किया जाएगा। सदस्यों की राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से बैठकों का बहिष्कार चल रहा था, जिसके कारण अधिकांश कार्य नहीं हो पा हो रहे थे, तो सदस्यों का रोष और गुस्सा होना भी स्वभाविक है।