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सपनों की उड़ान को मिले पंख, किसान की बेटी बनी पायलट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजस्थान Updated Wed, 12 Sep 2018 02:27 PM IST
वह जब भी आसमान में हवाई जहाज देखती तो बाल मन उसका बस सपना देखना शुरू कर देता, एक दिन मैं भी उड़ूंगी। लेकिन बीहड़ गांव में उसे कौन बताए कि कैसे उड़ता है हवाई जहाज और कौन उड़ाता है। भारी कौतूहल के बाद बाल मन ने किसान पापा से पूछा कि ये हवाई जहाज उड़ाता कौन है।  पापा का जवाब था -पायलट। उसके मन में कई और सवाल कुलबुलाने लगे कि आखिर ये पायलट कैसे बनते हैं। वह अपनी बेचैनी भरे सवालों के साथ पहुंची स्कूल और फिर अपने शिक्षक के सामने सवालों की झड़ी लगा दी। आज वह पायलट है और इंडिगो एयलाइंस की ऑफिशियल पायलट है। 

भाग्य लक्ष्मी राजस्थान के काला पीपल गांव की रहने वाली है। पायलट भाग्यलक्ष्मी ने 11 साल पहले आसमान में हवाई जहाज उड़ता देखकर पायलट बनने का सपना देखना शुरू किया। सपने को हकीकत में बदलने के लिए किसान पिता और स्कूल टीचर ने भरपूर मदद की। 

पहली सैलरी मिलते ही कहा- मैं छात्राओं की मदद करूंगी
भाग्यलक्ष्मी के पायलट बनने की कहानी पूरी फिल्मी है। बचपन में सपने तो कई लोग देखते हैं लेकिन भाग्यलक्ष्मी ने न केवल सपना देखा बल्कि उसे पूरा भी किया।  उन्होंने 2007 में सातवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान आसमान में हवाई जहाज को उड़ते देखा और पिता से पूछा कि ये हवाई जहाज कौन उड़ाता है। पिता ने रात में बताया- पायलट। सुबह स्कूल जाकर चुलबुली भाग्यलक्ष्मी ने अपने शिक्षक सतीश व्यास से कहा- सर मुझे पायलट बनना है, क्या करना होगा
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सातवीं कक्षा की बच्ची का यह सवाल सुनकर टीचर ने कहा- बेटा पहले तो तुम्हे दसवीं पास कर विज्ञान और गणित विषय लेकर पढ़ाई करनी होगी। उसके बाद तुम्हें पायलट बनने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा उसके बाद ही वह पायलट बनने की राह पर चल सकती है। फिर क्या था, भाग्यलक्ष्मी ने पायलट बनने का सपना हकीकत में बदलने की ठान ली। फिर पीछे पलट कर नहीं देखा और जब पहली सैलरी मिली तो टीचर के पास पहुंच कर सबको चौंका दिया और कहा- सर मैं पायलट बन गई हूं।

अब गांव की बेटियों के लिए पढ़ने और आगे बढ़ने में पूरी मदद करूंगी। भाग्य लक्ष्मी ने बताया कि रात में छत पर सोते समय आसमान में टिमटिमाती लाइटें देखी। पिता से पूछा तो उन्होंने कहा कि यह हवाई जहाज है। मैंने और सवाल किए तो उन्होंने डांटकर सुला दिया। मैंने उस रात पायलट बनने का सपना देखा फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। सपने को हकीकत में बदलकर ही दम लिया।

किसान पिता ने सपना पूरा करने में की मदद 
भाग्यलक्ष्मी के पिता एक किसान है। हर साल सूखे की मार झेल रहे पिता ने बेटी के सपने को सूखे से दूर रखा। पापा ने लोगों की परवाह न कर भाग्यलक्ष्मी के हर सपने को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पायलट बनीं तो शिक्षक को पहली पोस्टिंग की जानकारी दी और खुश होकर अपनी सैलरी भी बताना चाहती थीं लेकिन शिक्षक अपनी छोटी भाग्यलक्ष्मी की सैलरी में नहीं मुकाम पर पहुंचने से इतने उत्साहित थे कि उन्होंने कहा वेतन नहीं इस मुकाम पर पहुंचना मायने रखता है। 

जब वो गांव के स्कूल में पढ़ती थी, तो बच्चों को खाना परोसकर खाती थी। कुछ बच्चे अपनी झूठी थालियां छोड़ देते थे तो भाग्यलक्ष्मी उसे साफ करती थीं। कासोरिया से 10वीं पास कर वह नवोदय विद्यालय में गई। कानपुर से उड़ान शुरू की। वह इंडिगो में दिल्ली में को-पायलट हैं। उसका सपना है एक बार टीचर मेरी फ्लाइट में हो और वह विशेष घोषणा करें। 

भाग्यलक्ष्मी बताती हैं कि पायलट बनने का सपना देखा तो था लेकिन पापा को नहीं बताया। जब मैंने 10वीं पास की तो पापा ने विज्ञान लेने को कहा और मैंने गणित लिया। जब मैं 12वीं में थी तो मैंने पापा को पायलट बनने की इच्छा जताई। मैं चौंक गई पापा ने हां कर दी। हमने खोजबीन शुरू की, 12वीं के बाद पता चला कि उदयपुर से एकेडमी पॉयलट की ट्रेनिंग कराती है। मगर खर्च 20 लाख रुपये था। पापा को बताया पापा ने मेरे सपने को पूरा करना अपना मकसद बनाया और फिर उन्होंने हर वो काम किया जो एक पिता अपनी बेटी के लिए करता है और मैं आज आपके सामने हूं।

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