वर्षों तक जेल की चारदीवारी में रहने के बाद बाहर निकलने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए पुन: समाज का हिस्सा बनना काफी मुश्किल है। लेकिन राज्य सरकार ने एक राह निकाली है। अब राजस्थान के विभिन्न गांवों की छह गौशालाओं में खुली जेल बनाई गई हैं। जहां अच्छे आचरण वाले कैदियों को रखा जाएगा और गौशाला में कार्य करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
राज्य के जेल महानिदेशक के अनुसार राज्यभर में खुली जेलों के लिए वैकेंसी निकाली गई हैं, जिन्हें केन्द्रीय व जिला कारागारों में बंद अच्छे चाल—चलन वाले कैदियों से भरा जाएगा। महानिदेशक के अनुसार खुली जेल का मकसद जेल में बंद कैदियों का समाज के साथ तालमेल बैठाना है।
गौर करने वाली बात यह है कि देशभर में केवल राजस्थान ही ऐसा राज्य है, जहां खुली जेल की व्यवस्था को अच्छे से अपनाया गया है। राज्य में फिलहाल 29 खुली जेल संचालित की जा रही हैं। जहां रहने वाली कैदियों की संख्या 1332 है। कैदियों के लिए ओपर एयर कैम्प 1972 का नियम लागू किया गया था।
वर्तमान में खुली जेल में रहने वाले कैदी दिन में बाहर में जाकर काम करते है और शाम को वापस जेल में लौट आते है। यह प्रक्रिया सुबह छह बजे प्रारंभ होती है जब ऐसे कैदियों को एकत्रित किया जाता है सभी कागजी कार्रवाई की जाती है। उसके बाद यही प्रक्रिया शाम छह बजे अपनाई जाती है।