Congress: अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की संभावना के बीच राजस्थान के नए मुख्यमंत्री के नाम की चर्चा भी हो रही है। इस दौड़ में राजस्थान के दो नेताओं का नाम सामने आ रहा है। सियासी गरियारों में पहले नंबर पर प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और दूसरे पर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी का नाम लिया जा रहा है। हालांकि, अभी पूरी तरह से यह दावा नहीं किया जा सकता कि आने वाले समय में किसी और नाम की इस दौड़ में एंट्री नहीं होगी।
मुख्यमंत्री पद के दावेदार सीपी जोशी अशोक गहलोत के बाद राजस्थान कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेता है। उन्हें संगठन का लंबा अनुभव है। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले जोशी की प्रदेश के इस समुदाय पर अच्छी पकड़ हैं। सीएम अशोक गहलोत सभी उनके अच्छे रिश्ते हैं। बताया जा रहा है कि वह कांग्रेस आलाकमान को सीपी जोशी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सुझा भी चुके हैं। आए अब उनका एक मजेदार किस्से भी जान लेते हैं...।
दो महीने बाद बना दिए गए प्रदेश अध्यक्ष
सोनिया गांधी से सीपी जोशी की मुलाकात का यह किस्सा 2007 का है। 2008 में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने थे। चुनाव से करीब डेढ़ साल पहले सीपी जोशी पार्टी की चुनौतियों के बारे में सोनिया गांधी से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। सोनियां गांधी को अपना परिचय देते हुंए सीपी ने कहा था- मैडम मैं वही सीपी जोशी हूं जिसे अपने उग्र और बेबाक स्वभाव के लिए जाना जाता है, मैं यहां आपसे पार्टी के बारे में बात करने आया हूं। सीपी की सोनिया से मुलाकात के दो महीने बाद जोशी को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया था। हालांकि, इस बात का खुलासा कभी नहीं हो सका कि दोनों के बीच पार्टी की चुनौतियों को लेकर क्या बात हुई।
मुख्यमंत्री बनने से चूके
मुख्यमंत्री पद के दावेदार सीपी जोशी 2008 में सीएम बनने से सिर्फ एक कदम दूर रह गए थे। विधानसभा चुनाव में जोशी ने उनके लिए सबसे सुरक्षित सीट माने जाने वाली राजसमंद जिले की नाथद्वारा से पर्चा भरा था। जोशी उस दौर में कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। उनके बाद सीएम अशोक गहलोत का नंबर आता था। उस समय उन्हें राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाए जाना तय हो गया था। जोशी नाथद्वारा विधानसभा सीट से 1980, 1985, 1998 और 2003 में जीत भी चुके थे।
ऐसे में उनके लिए यहां से चुनाव जीतना बहुत आसान लग रहा था, लेकिन जो हुआ वह किसी ने नहीं सोचा था। सीपी जोशी एक वोट से चुनाव हार गए। इस चुनाव में उनकी पत्नी ने वोट नहीं दिया था। कहा जाने लगा कि अगर वह वोट जोशी को मिलता तो वह उस समय ही मुख्यमंत्री बन जाते। बाद में मीडिया से बात करते हुए जोशी ने इसकी पुष्टि भी की थी। उन्होंने कहा था, 'हां यह सच है, मेरी पत्नी और बेटी मतदान वाले दिन मंदिर गईं हुईं थीं, इस कारण वह मतदान नहीं कर पाईं'।