कांग्रेस विधायक, पूर्व कैबिनेट मंत्री और पंजाब प्रभारी हरीश चौधरी ने पेपर लीक मामले पर अपनी ही कांग्रेस सरकार को घेरा है। विधानसभा के बाहर मीडिया से रूबरू होकर चौधरी ने इशारों ही इशारों में बयान से सीएम गहलोत के उस बयान को गलत ठहरा दिया है, जिसमें मंत्री, नेता, अफसरों को क्लीन चिट देते हुए कहा गया था कि पेपर लीक में उनकी मिलिभगत नहीं है। बल्कि विपक्ष सरकार की उपलब्धियों से घबराकर झूठे आरोप जनता का ध्यान डायवर्ट करने के लिए लगा रहा है।
पेपर लीक मामला मेन मुद्दा मूल जड़ में जो है उसे पकड़े, चाहे नेता-अफसर हो
हरीश चौधरी ने कहा- पेपरलीक मामला मेन मुद्दा है, लेकिन उस पर बहस न होना ठीक नहीं है। ऐसी पद्धति से परीक्षा होनी चाहिए कि पेपर लीक न हो। उन्होंने कहा- इस मामले में जगह और जाति के आधार पर लोगों को बदनाम नहीं करना चाहिए। बल्कि पेपर लीक की मूल जड़ में कौन है, उसे पकड़ें ।
भले ही वह कोई जनप्रतिनिधि- नेता हो, सरकारी कर्मचारी- अफसर हो,उद्योगपति हो या कोई और हो। इस तरह क्लीन चिट देना ठीक नहीं है। क्योंकि जांच अभी जारी है। पेपर लीक के अलावा दूसरा बड़ा मुद्दा है प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित कराने वाली एजेंसी में कौन लोग हैं ? अमेरिका जैसे देशों में एकेडमिशियन सारी व्यवस्था चला रहे हैं। लेकिन क्या राजस्थान में हमें अच्छे शिक्षाविद नहीं मिल रहे हैं ,जो निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से परीक्षा करवाएं और युवाओं को रोजगार दिलाएं।
भाषा की मर्यादा सबको रखनी चाहिए
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की ओर से सोमवार को दिए गए बयान पर हरीश चौधरी बोले-भाषा की मर्यादा सबको रखनी चाहिए। पायलट के बयान- "कुछ लोग बार-बार हार का मुंह देखने के बाद भी पद नहीं छोड़ते " पर हरीश चौधरी ने चुप्पी साध ली।