राजस्थान विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद कई तरह की रोचक तथ्य सामने आए हैं। प्रदेश में मोदी फैक्टर को कांग्रेस अपने पक्ष में मान रही थी।
परिणामों से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित पार्टी का कहना था कि मोदी फैक्टर से कांग्रेस को फायदा हुआ है, क्योंकि अल्पसंख्यकों ने एकजुट होकर कांग्रेस को वोट डाले हैं, जो कांग्रेस की बड़ी जीत की ओर इशारा कर रहा है।
लेकिन परिणाम बाद सामने आया कि भाजपा की आंधी के चलते सभी मुस्लिम उम्मीदवारों ने कांग्रेस को निराश किया। इधर, भाजपा ने प्रदेश में मुस्लिम समाज से तीन उम्मीदवारों को उतारा इनमें से दो जीत कर विधानसभा पहुंच गए।
अल्पसंख्यकों को कांग्रेस अपना बड़ा वोट बैंक मानती है और इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने राजस्थान में 200 विधानसभा सीटों पर 16 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे। भाजपा ने इस समाज से तीन उम्मीदवारों को ही टिकट दी थीं।
कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए भाजपा की आलोचना भी की थी। कांग्रेस के लिए शर्मनाक तब हुआ, जब एक के बाद धराशाही होते मंत्रियों के बीच स्वास्थ्य मंत्री ए.ए. खान भी अपनी सीट गंवा बैठे।
जयपुर शहर में किशनपोल व आदर्श नगर सीट पर मुस्लिम समाज एक बड़ा वोट है और इसी कारण कांग्रेस ने किशनपोल से अपने जयपुर जिला अध्यक्ष सलीम कागजी के पुत्र अमीन कागजी को उतारा। साथ ही, आदर्श नगर से माहिर आजाद को मौका दिया।
दोनों उम्मीदवारों ने निराश किया। उधर, बाड़मेर की शिव सीट से पूर्व मंत्री अमीन खान को कांग्रेस ने टिकट दी, जिन्हें एनडीए सरकार में केन्द्रीय मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र सिंह ने 31 हजार से भी अधिक वोटों से हराया। बाकी सीटों पर भी कांग्रेस के अल्पसंख्यक उम्मीदवार भाजपा की आंधी के चलते अपनी सीट नहीं बचा पाए।
इधर, भाजपा ने नागौर जिले की डीडवाना सीट से पिछली भाजपा सरकार में परिवहन मंत्री युनुस खान को उतारा और नागौर सीट से हबीबुर्रहमान को मौका दिया, दोनों ने ही भाजपा की सीटों की संख्या बढ़ा दी। वहीं, धौलपुर से भाजपा के विधायक अब्दुल सगीर को हार का मुंह देखना पड़ा।
जमानत नहीं बचा पाए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
भाजपा को जनता ने ऐसा समर्थन दिया कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष चन्द्रभान की जमानत ही जब्त हो गई। केन्द्रीय मंत्री शीश राम ओला के कहने से कांग्रेस ने अपनी विधायक रीटा चौधरी का टिकट काटकर चन्द्रभान को झुंझुनूं की सीट से टिकट दिया।
टिकट देने के समय से ही इस सीट पर कांग्रेस के लिए रीटा चौधरी निर्दलीय के रूप में समस्या बनकर खड़ी हो गईं। चन्द्रभान चौथे स्थान पर रहे और उन्हें 15815 वोट ही मिल सके। जबकि जीत निर्दलीय नरेन्द्र कुमार की हुई और निर्दलीय रीटा दूसरे स्थान पर रहीं।