भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) चित्तौड़गढ़ ने बड़ी कार्रवाई कर प्रतापगढ़ जिले के जलोदा जागीर थाने में तैनात कांस्टेबल मंजीत सिंह को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। रिश्वत की कार्रवाई के दौरान भनक लगते ही कांस्टेबल फरार हो गया था। ऐसे में एसीबी का ट्रैप फेल हो गया था। इसी मामले में एसीबी ने डिप्टी सहित दो अन्य को जांच में रखा है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) चित्तौड़गढ़ एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह ने बताया कि आरोपी कांस्टेबल ने एक परिवादी से जब्त बाइक को छुड़वाने के बदले में पांच हजार रुपये की रिश्वत ली थी। इसके आगे 10 हजार रुपये की और मांग की थी। मामले में प्रार्थी 25 अक्तूबर 2024 को एसीबी कार्यालय प्रतापगढ़ पहुंचा था। यहां लिखित शिकायत दी कि उनके खिलाफ दर्ज एससी-एसटी एक्ट के मामले में बाइक छुड़वाने के एवज में कांस्टेबल मंजीत सिंह ने डिप्टी गोपाललाल हिंडोनिया के लिए रिश्वत मांगी जा रही है।
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शिकायत के आधार पर उसी दिन सत्यापन कार्रवाई की गई, जिसमें कांस्टेबल मंजीत सिंह को पांच हजार रुपये दिए थे। हालांकि आरोपी कांस्टेबल को मामले की भनक लग गई, जिससे आगे ट्रैप की कार्रवाई नहीं हो सकी।
कांस्टेबल के खिलाफ जांच में पुष्टि होने के बाद मंजीत सिंह निवासी नैथला, जिला अलवर को 28 मई 2025 को गिरफ्तार कर 29 मई को विशेष न्यायालय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, उदयपुर में पेश किया गया। यहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। प्रकरण में डीवाईएसपी गोपाल लाल हिंडोनिया एवं एएसआई दिलीप सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। दोनों के खिलाफ भी एसीबी की जांच जारी है।
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