नगर परिषद चित्तौड़गढ़ के कांग्रेस से पूर्व सभापति संदीप शर्मा पर लगे यौन शोषण के मामले में एक तरफ पुलिस जांच चल रही है, वहीं दूसरी ओर पार्टी ने भी लंबी जद्दोजहद के बाद सख्त निर्णय लिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संदीप शर्मा को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है। लंबी जांच और बचाव के तमाम प्रयासों के बावजूद कांग्रेस पार्टी ने उनकी प्राथमिक सदस्यता रद्द करते हुए निष्कासन का आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस से नगर परिषद के सभापति रहे संदीप शर्मा पर पिछले वर्ष एक महिला ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद उनके खिलाफ पार्टी के भीतर ही विरोध शुरू हो गया था। संदीप शर्मा ने भी महिला पर हनी ट्रैप का आरोप लगाते हुए सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इस बीच सोशल मीडिया पर शर्मा और युवती की तस्वीरें व वीडियो वायरल हो गए, जिससे उनके खिलाफ विरोध और तेज हो गया। हालांकि, उच्च न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद, महिला ने एक के बाद एक तीन प्रकरण दर्ज करवा दिए, और पूर्व सभापति ने भी एक मामला दर्ज करवाया। हाल ही में, महिला के पति ने भी चेक के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया।
न्यायालय से संदीप शर्मा को आंशिक राहत जरूर मिली, लेकिन कांग्रेस में उनके खिलाफ माहौल बिगड़ता चला गया। बढ़ते विरोध को देखते हुए पार्टी ने अनुशासन समिति गठित कर जांच करवाई। इसमें यह पाया गया कि इस पूरे प्रकरण से पार्टी की छवि खराब हुई है।
जिलाध्यक्ष की सिफारिश पर निष्कासन का आदेश
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संगठन महासचिव ललित तूनवाल ने एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि चित्तौड़गढ़ जिलाध्यक्ष का पत्र 20 मार्च को प्राप्त हुआ था। स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों और जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि संदीप शर्मा अनैतिक कृत्यों में लिप्त रहे हैं, जिससे पार्टी की छवि धूमिल हुई है। यह घोर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इसी को ध्यान में रखते हुए, पूर्व सभापति संदीप शर्मा को कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से छह वर्षों के लिए निष्कासित किया जाता है।
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