निकाय चुनाव से पहले चित्तौड़गढ़ की राजनीति में नए समीकरण बनने के संकेत मिले हैं। निर्दलीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने भाजपा के पूर्व विधायक नरपत सिंह राजवी से मुलाकात की। बैठक के बाद आक्या ने राजवी को अपना बड़ा भाई और संरक्षक बताते हुए आगामी चुनाव में मिलकर काम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि सांसद सीपी जोशी, पूर्व विधायक नरपत सिंह राजवी, भाजपा जिलाध्यक्ष और संगठन की पूरी टीम मिलकर नगर परिषद, पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव लड़ेगी। आक्या ने स्पष्ट किया कि चुनाव में प्रत्याशियों के चयन का अंतिम निर्णय पार्टी संगठन ही करेगा और संगठन के फैसले का सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पालन करना होगा।
जीताऊ प्रत्याशियों को प्राथमिकता
निकाय चुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर आक्या ने कहा कि संगठन ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देगा, जिनके जीतने की संभावना मजबूत हो। सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की बात कही लेकिन जीत की संभावना को देखते हुए संगठन किसी अन्य वर्ग के उम्मीदवार पर भी निर्णय ले सकता है।
उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने की इच्छा रखना हर कार्यकर्ता का अधिकार है, लेकिन सभी को टिकट देना संभव नहीं होता। संगठन कार्यकर्ताओं की क्षमता और परिस्थितियों के अनुसार जिम्मेदारी तय करेगा। आक्या ने वर्ष 2028 का विधानसभा चुनाव लड़ने के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में पार्टी अवसर देती है तो वे चुनाव जरूर लड़ेंगे। हालांकि फिलहाल उनकी प्राथमिकता नगर परिषद, पंचायत समिति और जिला परिषद में भाजपा के बोर्ड बनाना है।
ये भी पढ़ें: Sirohi News: चिंटूसिंह हत्याकांड का वांछित आरोपी गिरफ्तार, 110 दिन बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा इनामी बदमाश
कांग्रेस पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के बयानों पर पलटवार करते हुए आक्या ने उन्हें अपने कार्यकाल का हिसाब देने की नसीहत दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान नगर परिषद और यूआईटी में कथित तौर पर एजेंटों के जरिए वसूली होती थी। उन्होंने जमीनों पर अवैध कब्जे और भ्रष्टाचार तथा गुंडागर्दी का माहौल होने के भी आरोप लगाए। आक्या ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया के साथ हुई मारपीट की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में सरकारी कार्यालयों में एजेंट बैठाकर वसूली नहीं होती। यदि ऐसा कोई उदाहरण है तो उसे सामने लाया जाना चाहिए।
मतभेद खत्म होने के संकेत
विधानसभा चुनाव के बाद नरपत सिंह राजवी और चंद्रभान सिंह आक्या के बीच मतभेदों की चर्चाएं होती रही थीं। अब दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद राजनीतिक दूरियां कम होने के संकेत मिल रहे हैं। बैठक के दौरान बस्सी मंडल अध्यक्ष भंवर सिंह खड़ीबावड़ी और प्रदीप काबरा भी मौजूद रहे। राजवी के कामकाज को लेकर पूछे गए सवाल पर आक्या ने कहा कि वे वरिष्ठ नेता हैं और उनके बारे में टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पहले भी राजवी के नेतृत्व में काम कर चुके हैं और आगे भी उनके साथ मिलकर काम करेंगे।
विकास कार्यों को लेकर भाजपा का दावा
आक्या ने भाजपा शासन के दौरान क्षेत्र में हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने फोरलेन सड़क, अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, PHED की पेयजल योजनाओं और रिवर फ्रंट जैसी परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा की प्राथमिकता क्षेत्र का चहुंमुखी विकास है।
निकाय चुनाव से पहले भाजपा नेताओं की यह एकजुटता चित्तौड़गढ़ की स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में प्रत्याशी चयन और संगठनात्मक रणनीति के साथ चुनावी तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।