राजस्थान और मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने रबी फसल के लिए चंबल की दाईं मुख्य नहर में 18 अक्तूबर से पानी छोड़ने पर सहमति दी है। कम बारिश के कारण चंबल बेसिन के बांधों में जल उपलब्धता में कमी को देखते हुए दोनों राज्यों के मध्य प्रदेश-राजस्थान अंतरराज्यीय नियंत्रण मंडल की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। दाईं मुख्य नहर में शुरुआत में 2000 क्यूसेक पानी प्रवाहित होगा, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। मुख्य सिंचाई मौसम के दौरान पेयजल सुरक्षा और कृषि जल प्रबंधन को संतुलित बनाए रखने के लिए दोनों राज्यों के अधीक्षण अभियंता स्तर के अधिकारी लगातार आपस में तालमेल रखेंगे।
तकनीकी समिति की यह बैठक वर्चुअली राजस्थान के मुख्य अभियंता (पूर्व) एवं अतिरिक्त सचिव, सीएडी राजस्थान जयपुर की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक के दौरान रबी फसल के आगामी सीजन 2026-27 के लिए पानी की कुल मांग, आपूर्ति और बांधों के जलस्तर को नियंत्रित रखने से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के अधिकारियों ने रबी फसल की बुवाई के लिए 18 अक्तूबर से पानी की तात्कालिक आवश्यकता जताई थी, जिस पर राजस्थान के सीएडी अधिकारियों ने सहमति दे दी।
नहरी जल प्रवाह और बांधों की स्थिति
इस बार मानसूनी वर्षा में कमी के कारण चंबल नदी पर बने प्रमुख बांधों में पानी का भराव पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज किया गया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार गांधी सागर बांध में 76.18 प्रतिशत, राणा प्रताप सागर बांध में 72.12 प्रतिशत, जवाहर सागर बांध में 71.63 प्रतिशत और कोटा बैराज में 98.08 प्रतिशत जल उपलब्धता रही। सीमित जल संचयन को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने जल प्रबंधन की विशेष योजना बनाई है।
राणा प्रताप सागर एवं जवाहर सागर बांध वृत्त कोटा के अधीक्षण अभियंता ने बैठक में बताया कि रबी सीजन के दौरान राणा प्रताप सागर बांध का जलस्तर न्यूनतम 1,150 फीट बनाए रखना अनिवार्य है। इसके अलावा रबी सीजन के बाद भी इस बांध का जलस्तर कम से कम 1,145 फीट रखा जाएगा। इससे आगामी गर्मियों में पेयजल संकट उत्पन्न नहीं होगा। सीएडी कोटा के अधीक्षण अभियंता ने भी इस सुझाव का समर्थन करते हुए कहा कि 1,150 फीट जलस्तर बनाए रखने से नहरों के संचालन और पानी के नियमन में आसानी होगी।
जल मांग समन्वय और फसल प्रबंधन
नहरों में मांग के अनुसार निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान की तरफ से मध्य प्रदेश के गांधी सागर बांध से लगातार पानी छोड़ने का आग्रह किया गया। मध्य प्रदेश के गांधी सागर बांध खंड के अधीक्षण अभियंता ने इस विषय पर सकारात्मक आश्वासन दिया है। वहीं मध्य प्रदेश के प्रतिनिधियों ने रबी के मुख्य सीजन में जल समझौते के अनुरूप पूरी आपूर्ति न मिलने पर आपत्ति जताई और पीक डिमांड के दौरान 3200 क्यूसेक पानी देने का अनुरोध किया।
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सीएडी कोटा के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब दोनों राज्यों में एक साथ पानी की अधिकतम मांग उत्पन्न होती है, तब जल नियमन में कठिनाई आती है। इसके बावजूद वर्ष 2026-27 के दौरान निर्धारित इंडेंट के अनुसार पानी देने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा। जल की सीमित उपलब्धता को देखते हुए चंबल कमान क्षेत्र के काश्तकारों को अधिक पानी की खपत वाली फसलों के बजाय कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों, जैसे चना आदि की खेती के लिए प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया गया।