राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के ब्रह्मानंद शर्मा अंधेरे में जीते हैं, लेकिन अब वे जज की कुर्सी पर बैठकर न्याय चाहनेवालों को रोशनी दे सकेंगे।
ब्रह्मानंद राजस्थान के पहले दृष्टिहीन जज होंगे। बस उन्हें नियुक्ति मिलने का इंतजार है।
पिछले तीन माह से जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ में अटकी पड़ी उनकी नियुक्ति को हाल ही में स्वीकृति मिली है।
जानकारी के अनुसार पूर्ण पीठ ने 20 नवंबर 2013 को आरजेएस में चयनित 114 में से 112 अभ्यर्थियों को तो नियुक्ति की अनुमति दे दी थी, पर शर्मा की नियुक्ति दृष्टिहीन होने के कारण अटक गई थी।
शर्मा अभी भीलवाड़ा में सार्वजनिक निर्माण विभाग के दफ्तर में एलडीसी हैं। उनके अनुसार लोगों की सोच बदलने और अपने जैसे लोगों को न्याय दिलाने के लिए जज बनने का सपना देखा था, जो पूरा हो रहा है।
उन्होंने अपना दर्द बताया कि दफ्तर में सभी उनहें हीनता से देखते थे। इसलिए उन्होंने ऊंचा पद हासिल करे की ठानी थी।
ब्रह्मानंद ने बताया कि पहली बार 2008 में आरजेएस परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर, 2011 की भर्ती में शामिल हुए, तो सपना पूरा होता दिखा।