अलवर जिले के बहरोड़ में बीजेपी सांसद बाबा बालकनाथ के पुलिस थाने में घुसकर डीएसपी को धमकी देने पर विवाद हो गया। सांसद ने डीएसपी से कहा- मेरा नाम याद रखना,तीन लोग मेरी लिस्ट में हो।यहां का विधायक ,पुराना एसएचओ और मेरी लिस्ट में अब आप भी हो गए। सांसद ने डीएसपी आनंद राव को कहा- 8 महीने की सरकार है, याद रखूंगा। यह पूरा विवाद बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गैंगवार के एक मामले में हिरासत में लेने पर रविवार को हुआ।
6 जनवरी को अस्पताल में गैंगवार में 2 महिलाओं को लगी थी गोली
अलवर जिले के बहरोड़ पुलिस थाने पर रविवार सुबह से ही हंगामा होता रहा। बहरोड़ पुलिस की ओर से राजनीतिक पार्टियों के 3 समर्थकों को पूछताछ के लिए बुलाने पर यह हंगामा हुआ। मौके पर पहुंचे अलवर सांसद महंत बालक नाथ और डीएसपी आनंद राव के बीच काफी कहासुनी हो गई, जिससे हालात तनावपूर्ण पैदा हो गए। इसके बाद महंत बालक नाथ डीएसपी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर डीएसपी कार्यालय के सामने अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए।
वहीं सूचना के बाद मौके पर पहुंचे भिवाड़ी के पुलिस अधीक्षक शांतनु कुमार सिंह ने उन्हें समझाइश करने की कोशिश की। लेकिन शाम तक कोई नतीजा नहीं निकला। देर शाम सांसद ने अपना धरना खत्म कर दिया। वहीं पुलिस अधीक्षक ने इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी है और इस पूरे मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी से कराए जाने का निर्णय लिया है।
सांसद बोले- पुलिस की वर्दी में तुम सबसे बड़े गुंडे हो
तनावपूर्ण स्थिति के बीच अलवर सांसद ने बहरोड़ के डीएसपी आनंद राव को कहा कि पुलिस की वर्दी में तुम सबसे बड़े गुंडे हो। जो एक विधायक के कहने पर काम करते हो और निर्दोष लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हो। बहरोड़ से निर्दलीय बलजीत यादव विधायक हैं, जो हमेशा ही विवादों में रहे हैं। निर्दलीय विधायक चुने जाने के बाद उन्होंने कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया था।
बहरोड थाने के बाहर राजनीतिक कार्यकर्ताओं का धरना
अलवर जिले की बहरोड़ विधानसभा में राजनीतिक द्वेषता चलती आ रही है।बहरोड़ पुलिस ने 3 लोगों को हिरासत में लिया है। जो राजनीतिक पार्टियों के समर्थक हैं। हिरासत में लिए लोगों से बहरोड़ पुलिस पूछताछ कर रही है। हिरासत में लेने के बाद समर्थकों की पुलिस थाने में भीड़ जमा है और बहरोड़ पुलिस थाने के सामने धरना भी दिया जा रहा है।
4 दिन पहले विवाद की शुरुआत
इस पूरे विवाद शुरुआत चार दिन पहले 4 जनवरी 2023 को बहरोड़ की सरकारी कॉलेज में आयोजित छात्र संघ अध्यक्ष के शपथ ग्रहण समारोह से शुरू हुई। कार्यक्रम में राजस्थान के बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और अलवर सांसद बालक नाथ ने अतिथियों के रूप में शिरकत की थी।
इस कॉलेज के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में पहले भी अतिथियों को बुलाने को लेकर विवाद हुआ था।उस दौरान कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष ने अपने समर्थकों के साथ कुछ दिन अनशन पर बैठकर धरना दिया था। समझाइश के बाद बीजेपी नेताओं के मुख्य आतिथ्य में कार्यक्रम करवाया था।
उस कार्यक्रम में जैनपुरवास गांव से काफिले के साथ आपराधिक प्रवृति के युवक भी शामिल हुए बताए। कॉलेज के कार्य समापन के एक-दो दिन बाद ही जैनपुरवास गांव की जसराम गैंग ने पुलिस कस्टेडी में सरकारी अस्पताल में मेंडिकल के लिए लाए गए बदमाश विक्रम उर्फ लादेन पर गोलियां बरसाकर मारने की कोशिश की थी।
जिसमें लादेन तो बच गया, लेकिन अस्पताल में इलाज के लिए आई दो महिला गोलियों की चपेट में आ गई थीं। उनके पैरों में गोली लगी थी। इसके बाद गोलीकांड में रविवार को बहरोड़ पुलिस ने जिन तीन लोगों को हिरासत में लिया है,उनमें से दो लोग कांग्रेस नेता बस्तीराम यादव के समर्थक हैं। एक युवक सांसद बालकनाथ योगी का समर्थक है।
एडवोकेट राजाराम यादव, हितेंद्र यादव,बीजेपी समर्थक निशांत यादव हिरासत में
पुलिस ने एडवोकेट राजाराम यादव और हितेंद्र यादव के साथ ही बीजेपी समर्थक निशांत यादव उर्फ सोनू को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। इसके बाद बहरोड़ पुलिस थाने के बाहर रविवार सुबह से ही काफी संख्या में राजनीतिक लोग इकट्ठा हो गए। बताया जा रहा है कि पुलिस ने एडवोकेट राजाराम यादव, हितेंद्र यादव और निशांत यादव को पिछले दिनों बहरोड़ कॉलेज में आयोजित छात्र संघ शपथ ग्रहण समारोह का आयोजक बताते हुए थाने में बुला लिया और वहीं बैठा लिया।
उसी समारोह में हिस्ट्रीशीटर जसराम गुर्जर का भाई रामफल गुर्जर भी मौजूद था। जिसे अस्पताल में हुई फायरिंग की घटना में शामिल बताया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि रामफल गुर्जर ने अपने आदमी भेजे थे। इसी घटना को जोडकर पुलिस उन सभी को थाने लेकर आई है। थाने पर इकट्टा हुए लोग उनको छोड़ने की मांग कर रहे हैं। एडवोकेट बस्तीराम यादव ने बताया कि पुलिस क्षेत्र के भामाशाह राजाराम एडवोकेट और हितेन्द्र एडवोकेट को सुबह जल्दी थाने में ले आई। पुलिस ने दोनों को बहरोड़ कॉलेज में आयोजित छात्र संघ समारोह के आयोजक मानते हुए अस्पताल में हुए गोलीकांड के मामले में आरोपियों बुलाया था।
इसके बाद अलवर के बीजेपी सांसद महंत बालक नाथ बहरोड थाने में पहुंचे और उनको हिरासत में लिए जाने का कारण पूछा, तो पुलिस ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इसके बाद सांसद आक्रोशित हो गए और सीधा पुलिस उपाधीक्षक आनंद राव पर हमला बोलते हुए कहा कि इस पुलिस की वर्दी में तुम सबसे बड़े गुंडे हो। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई और वहां माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया की अन्य थानों की पुलिस को भी बुलाना पड़ा। यह तनावपूर्ण स्थिति करीब 1 घंटे तक चलती रही। पुलिस उपाधीक्षक और सांसद में काफी नोकझोंक हुई। दोनों ओर से खुलेआम धमकी दी गई।
विधायक बलजीत यादव पर सांसद के आरोप
अलवर सांसद महंत बालक नाथ ने कहा कि बहरोड के विधायक बलजीत यादव ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है, क्योंकि उन्होंने हरियाणा में विधायक के खिलाफ मानहानि का केस किया हुआ है। जिसमें गैर जमानती वारंट निकले हुए हैं। आगामी 24 जनवरी को उसकी पेशी है । गैर जमानती वारंट निकलने के बाद विधायक बिल्कुल बौखला गए हैं और वह पुलिस को अपना हथियार बनाकर भाजपा और कांग्रेस के समर्थकों के खिलाफ अनर्गल आरोप लगाकर उनका हरेसमेंट कर रहे हैं।
एडिशनल एसपी से जांच करवाई जाएगी
भिवाड़ी के पुलिस अधीक्षक शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई गई और पीड़ितों से बातचीत की है। प्रारंभिक जानकारी मुख्यालय को भेज दी गई है। इस पूरे घटनाक्रम की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हेड कांस्टेबल धीर सिंह के व्यवहार के सवाल पर उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ लिखित शिकायत मिली है। इस पूरे प्रकरण में जांच में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी । इस संबंध में सांसद बालकनाथ और डॉक्टर आरसी यादव सहित अन्य प्रतिनिधियों से वह मिले हैं। उनसे पूरी जानकारी हासिल की है।
इधर, सांसद बालक नाथ ने पुलिस पर विश्वास करते हुए अपना धरना समाप्त कर दिया है और पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि अंतिम बार विश्वास किया है। हमने लिखित में कोई आश्वासन नहीं लिया है। पुलिस की बात पर मौखिक विश्वास किया है। इस संबंध में उन्होंने पुलिस महानिदेशक से भी बात की है।
डीजी ने 5 दिन में इस पूरे घटनाक्रम की जांच कराने और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। सांसद बालकनाथ ने कहा- हेड कांस्टेबल धीर सिंह और पुलिस उपाधीक्षक ने जानबूझकर निर्दोष कार्यकर्ताओं को फंसाने की कोशिश की है। उच्च स्तरीय राजनीतिक दबाव के कारण ऐसा हुआ है। लेकिन पुलिस पर विश्वास करते हुए हम चाहते हैं कि इस मामले की जांच हो। जो कार्रवाई नहीं करेगा उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी।