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करौली हिंसा पर बोले राजेंद्र राठौड़: सीएम ने उपद्रवियों को खुली छूट दी, यह सरकार के लिए नासूर बनेगा

Fri, 08 Apr 2022 12:11 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करौली

सार

राजेंद्र राठौड़ ने दावा किया कि हिंसा के दौरान पुलिस मूक दर्शक बन कर तमाशा देखती रही। उन्होंने कहा कि कुछ वीडियो में पुलिस दंगाइयों से कह रही है कि बहुत हो गया, जुलूस का रथ तोड़ दिया, मोटर साइकिलें जला दीं, काम हो गया, अब आगे बढ़ो। मैंने कभी भी पुलिस को इस तरह मूक दर्शक बना नहीं देखा। पढ़ें राठौड़ का पूरा इंटरव्यू...
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कारौली हिंसा पर उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिंदू नव वर्ष पर करौली हिंसा में उठी लपटों की आग अब बुझ चुकी है, लेकिन शहर में सांप्रदायिक तनाव अभी भी बना हुआ है। हालात सामान्य करने के लिए प्रशासन ने दस अप्रैल तक कर्फ्यू बढ़ा दिया है। एसआईटी और पुलिस की टीमें मामले की जांच कर रहीं हैं। उपद्रवियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

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हिंसा को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब के लिए हमने बात की उप नेता प्रतिपक्ष और पूर्व चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ से। राठौड़ भाजपा की ओर से हिंसा की जांच को लेकर बनाई गई कमेटी के प्रभारी भी हैं। उन्होंने करौली जाकर वहां के हालातों को देखा और हिंसा के शिकार लोगों से भी बात की है। आइए अब जानते हैं हिंसा, महंगाई और तुष्टीकरण की राजनीति पर राजेंद्र राठौड़ ने क्या कहा...
 

सवाल: क्या आपको लगता है कि हिंसा सुनियोजित थी?
जवाब:
पत्थर हेलीकॉप्टर से नहीं गए, रातों-रात सुनियोजित तरीके से घरों की छतों पर टनों पत्थरों इकट्ठे किए गए और फिर हमला किया गया। मैं समझता हूं कि पीएफआई राजस्थान में अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। सीएमओ के दखल के बाद दो फरवरी को पीएफआई को कोटा में हिजाब के समर्थन में रैली निकालने की अनुमति मिली थी। पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद आसिफ ने एक अप्रैल को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को एक पत्र भी लिखा था। जिसमें कहा गया था कि 2 से 4 अप्रैल के बीच प्रदेश मैं तनाव होगा और सामाजिक सौहार्द। ये चेतावनी सही साबित हुई। सुनियोजित तरीके से चाकू, तलवारों, लाठी और पत्थरों से लोगों पर हमला किया गया है। मैं दर्जनों घायलों से मिलकर आया हूं, जली हुईं दुकानें इस बात की गवाही दे रही हैं कि उपद्रवियों को हमला करने की खुली छूट थी। उसी का परिणाम है कि करौली और पूरे भरतपुर संभाग में सामप्रदायिक सदभाव बिगड़ चुका है।

सवाल: कांग्रेस का कहना है कि पेट्रोल बम की शुरुआत रैली में शामिल लोगों की ओर से की गई है?
जवाब:
जुलूस में शामिल व्यक्ति के पास अगर एक भी पेट्रोल बम था तो मैं दंड के लिए तैयार हूं। दंगों के कुख्यात लोग यहां अगुआई कर रहे थे, उसके बाद भी उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है। इस प्रकार कैसे सदभाव बनेगा। ये राज धर्म नहीं है, सरकार को राज धर्म निभाना चाहिए। 

सवाल: क्या तय रूट पर रैली नहीं निकाली गई थी?
जवाब:
प्रशासन ने अगर कोई रूट तय किया है तो उसका पालन करना चाहिए। अगर रूट में बदलाव किया गया है तो प्रशासन को बताना चाहिए। वह अपनी बात को साफ तरीके से कहे। प्रशासन चुप क्यों है? रैली तय रूट पर ही गई थी। इस दौरान एक व्यक्ति के पास भी माइक नहीं था, सिर्फ डीजे चल रहा था और जय श्रीराम के नारे लग रहे थे। एक ही नाम जय श्रीराम...अगर हिंदुस्तान में यह कहना भी गुनाह है तो ये गुनाह हमें कबूल है। 
 

सवाल: कांग्रेस नेता रफीक खान ने एक वीडियो दिखाया, जिसमें रैली में शामिल लोग मस्जिद पर चढ़कर झंडा लगाते हुए दिख रहे हैं?  
जवाब: मैं नहीं समझता ऐसा हुआ है। छह अप्रैल को मेरी प्रशासन के सभी बड़े अधिकारियों से बात हुई है। उनके पास इस तरह का कोई वीडियो हो तो दिखाएं। कहीं का वीडियो कहीं जोड़कर दिखाना गलत है। मैं इसका विरोध करता हूं।

सवाल: सरकार की कमेटी ने कहा कि रैली में लोग तलवारें लेकर रैली में गए थे?
जवाब: देखिए, इस पूरे मामले में सारी चीजें स्पष्ट इसलिए हैं क्योंकि पूरी घटना वीडियो में कैद है। मीडिया संस्थानों ने खुलासा किया है, वीडियो में दंगाइयों के चहरे भी है। बुधवार (छह अप्रैल) को मैंने चार वीडियो प्रशासन को दिए हैं। शांति समिति की बैठक में मैंने प्रशासन से कहा कि यहां बैठे लोगों के चेहरे आप देख लो, किन लोगों के हाथ में लाठियां है और कौन लोगों को भड़का रहा है। सारी चीज, सारे एक्ट वीडियो में कैद हैं तो उसको नकारा नहीं जा सकता है। अगर कोई ऐसा वीडियो है जिसमें भाजपा या हिंदू समाज के लोग किसी को भड़का रहे हैं तो उनका भी वीडियो सामने लाना चाहिए।

सवाल: हिंसा पर सरकार के रुख को लेकर क्या कहेंगे? 
जवाब: प्रदेश सरकार तुष्टीकरण की नीत पर काम कर रही हैं। पहला मौका में देख रहा हूं कि जब कोई सरकार हिंसा की जांच के लिए विधायकों की कमेटी बनाती है, और जांच करने एक ऐसे विधायक जाते हैं जो कहते हैं कि नव वर्ष पर निकाली गई रैली में आपत्तिजनक नारे लगे जिससे हिंसा भड़की। पहली बात तो यह कि ऐसा कोई नारा रैली में लगा ही नहीं और अगर लगा तो पुलिस का अमला भी रैली के साथ चल रहा था। उनका भी कोई कर्तव्य होता होगा। इस प्रकार के हमले को मुख्यमंत्री जी ने भी क्लीन चिट दे दी। यह पूरा मामला तब हुआ जब आपत्तिजनक नारे लगे यानी एक गृहमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री जी उपद्रवियों को खुली छूट दे रहे हैं। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार का रवैया अभिभावक की तौर पर होना चाहिए। सांप्रदायिक सद्भाव के पक्षधर हम भी हैं, पर सरकार को भी रहना चाहिए। पक्षपात पूर्ण चश्मे से हर बात को देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार के जहाज में बहुत छेद हैं तेजी से पानी भर रहा है। इस सरकार ने अब जो कर्म किया है यह उसके लिए नासूर साबित होगा।

सवाल: सीएम ने कहा था- जेपी नड्डा और अमित शाह प्रदेश में आग लगाने आते हैं, इस पर क्या कहेंगे ?
जवाब:
अनर्गल बयान देना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की आदत बन गई है। जब भी कोई बड़ी घटना होती है तो अमित शाह और जेपी नड्डा के नाम से जोड़कर हवा में उछाल देते हैं। यह उनकी आदत है, पर जनता सब जानती है। जब से राजस्थान बना है तब से अशोक गहलोत सबसे विफल गृहमंत्री रहे हैं। नेशनल क्राइम ब्यूरो की रिपोर्ट चीख-चीखकर प्रदेश के हलात बयां कर रही है। 
 

सवाल:  भाजपा प्रदेश सरकार पर और सरकार भाजपा पर तुष्टीकरण करने का आरोप लगाती है, ऐसा क्यों है? 
जवाब:
आपने जोधपुर डिस्कॉम का आदेश देखा होगा। उसमें साफ तौर पर कहा गया है कि रमजान का महीना चल रहा है, इसलिए मुस्लिम इलाकों में बिजली कटौती नहीं होनी चाहिए। क्या नवरात्रि नहीं है। इस तरह के आदेश से सरकार की मानसिकता सामने आती है। यह वोट बैंक की राजनीति लंबे समय तक चलने वाली नहीं हैं।

सवाल: मुख्यमंत्री का कहना है कि भाजपा कभी महंगाई पर बात नहीं करती ?
जवाब:
देखिए, महंगाई पर मुख्यमंत्री जी को बात करनी चाहिए। उन्होंने अपने घोषणा पत्र में महंगाई नियंत्रण के लिए पुख्ता कदम उठाए जाने का वादा प्रदेश की जनता से किया था। अब इस सरकार की आधी से ज्याद उम्र बीत गई है। उन्होंने कौन-कौन से कदम उठाए, यह तो उनका काम था। उन्होंने कहा था कि हम पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतों को नियंत्रित करेंगे, ये उनका काम है। अगर यह नहीं कर सकते थे तो वोट की फसल काटने के लिए जनता से वादा क्यों किया था? राजस्थान में पेट्रोल और डीजल पर सबसे अधिक वैट है। सर्वाधिक महंगी बिजली और मंडी टैक्स है। उसके बाद यह महंगाई कम करने ढोंग करते हैं। सरकार ने कहा था कि हम किसानों को उनके उतपाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए हस्तक्षेप योजना लेकर आएंगे, क्यों नहीं लेकर आए? 
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सवाल: हिंसा पीड़ित लोगों को मुआवजा देने की बात कही जा रही है?
जवाब:
जिन दुकानदारों की दुकानें जलीं उनकी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। मैं खुद देखकर आया हूं, 50 से ज्यादा मोटर साइकिल जलीं और टूटी हुईं पड़ीं हैं, उनकी भी एफआईआर नहीं हुई है। जिन लोगों को चोट लगी उनका केस भी अब तक दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि, प्रशासन ने मुझे आश्वासन दिया गया है कि हम एफआईआर करेंगे। धारा 107 और 151 में 61 लोगों को पाबंद किया गया है। इनमें ज्यादातर हिंदू समाज के लोग हैं। ये सारी बातें बता रहीं हैं कि कहीं न कहीं राजस्थान असंतुलन की ओर बढ़ रहा है। ये सब सरकार की शह पर हो रहा है। जिस तरीके से अचानक हमला हुआ उससे साफ है कि यह सुनियोजित था। जिन मकानों की छत से पत्थर आ रहे थे वह किसके घर थे? 13 घरों को चिन्हित किया गया है। हमने पुलिस पर दबाव बनाया तो उन घरों को सीज भी किया गया है। इन मकानों का मालिक कौन है इसे झुठलाया नहीं जा सकता। 

क्या है करौली हिंसा का सच? बीजेपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र राठौर से खास बातचीत का वीडियो यहां क्लिक कर देखें 
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