राजस्थान में हुए खूंनी संघर्षों तथा राणा सांगा जैसे
रणबांकुरों की शौर्य गाथाओं से सराबोर रहे मेवाड़ के चित्तौडग़ढ़ में
चुनावी माहौल अपने चरम पर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार व
चित्तौडग़ढ़ सीट से सांसद गिरिजा व्यास के सामने भाजपा ने एक युवा चेहरे को
उतारकर मुकाबला रोचक बना डाला है।
केन्द्रीय मंत्री गिरिजा व्यास
को अधिकतर लोग जानते हैं, लेकिन भाजपा की सूची में 38 वर्षीय चन्द्रप्रकाश
जोशी का नाम आने पर सभी चौंक गए थे। जोशी का यह पहला बड़ा चुनाव है, वे
यहां भाजपा के जिला प्रमुख हैं और कार्यकर्ताओं और जनता से उनका सीधा
जुड़ाव है।
क्षेत्र के पिछड़ेपन, मेडिकल कॉलेज के आश्वासन के बाद
की वादाखिलाफी सहित कई बड़ी समस्याएं 67 वर्षीय गिरिजा व्यास पर भारी पड़ती
दिख रही हैं। मतदाताओं की बातों से लगा कि वे नए चेहरे को आजमाना चाहते
हैं। चित्तौडगढ़ संसदीय क्षेत्र में अब तक हुए 15 चुनाव में से सात बार
कांग्रेस और आठ बार गैर कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव जीते।
कठिन है डगर
गिरिजा व्यास के लिए स्थानीय समीकरण कुछ टेढ़े बने
हुए हैं। उन्हें विधानसभा चुनाव में करारी हार का स्वाद चखने के बाद
कांग्रेस के हताश कार्यकर्ताओं का साथ मिल रहा है, जिनमें ऊर्जा की नितांत
कमी है।
खास बात यह है कि इस क्षेत्र में प्रभाव रखनेवाले कांग्रेस
के पूर्व विधायक उदयलाल आंजना को जालोर सीट से टिकट मिला है। आंजना के
प्रचार के लिए उनके खास समर्थक उनके साथ जालोर रवाना हो चुके हैं।
विधानसभा
की आठ में से सात सीटें भाजपा ने हासिल की, एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार को
मिली, जो भाजपा के ही साथ है। ऐसे में भाजपा के जोशी को स्थानीय नेता होने
के नाते और विधानसभा में भाजपा की बड़ी जीत का दोहरा फायदा मिल रहा है।
मोदी की लहर को भुनाने की कोशिश
मोदी लहर के चलते स्थानीय नेता भी जोशी के साथ जुटे
हुए हैं। सांसद गिरिजा व्यास से विकास की उम्मीद लगाए बैठी रही जनता की
उनसे काफी शिकायतें और कइयों की नाराजगी भी उन्हें झेलनी पड़ सकती है।
जोशी
कभी चुनाव जीत कर आए जनप्रतिनिधि नहीं रहे, इस कारण वे लोगों की शिकवे
शिकायतों से बचे हुए हैं। हालांकि गिरिजा की मेवाड़ में लंबी राजनीति के
कारण लगभग सभी प्रमुख पदाधिकारियों व क्षेत्र से पहचान है।
गिरिजा को खुद का लंबा और बेदाग सार्वजनिक जीवन से चुनाव जीतने की उम्मीद है।
जातिगत मतदाताओं का जोड़-भाग
ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या को देखते हुए दोनों ही
पार्टियों ने इस सीट से ब्राह्मण उम्मीदवार चुने हैं। भाजपा ने गिरिजा के
मुकाबले ब्राह्मण उम्मीदवार को मैदान में उतारकर एक जाति के लामबंद होने को
रोक दिया।
यहां कुल मतदाता संख्या करीब सवा 18 लाख है, जिसमें दो
लाख ब्राह्मण व इतने ही राजपूत मतदाता हैं। जाट और अल्पसंख्यक मतदाताओं की
संख्या भी एक-एक लाख बराबर है।
गिरिजा को महिला मतदाताओं का साथ
मिलने की उम्मीद हैं, जिनके पास करीब 8 लाख 90 हजार मत हैं। वहीं पुरुष
मतदाताओं की संख्या करीब 9 लाख 30 हजार है।
मुख्य समस्याएं
राजस्थान की पिछली गहलोत सरकार ने मेडिकल कॉलेज की
घोषणा की थी पर हाल में केंद्र से मंजूर राजस्थान के पांच मेडिकल कॉलेज में
चित्तौडग़ढ़ का नाम नहीं होना नया मुद्दा बन गया है।
रेल सुविधा में विस्तार, औद्योगीकरण की कमी, खनन मजदूरों क दूभर हालत, अफीम किसानों को जमीन के पट्टे नहीं मिलने की समस्या।
चित्तौडग़ढ़ व एक-दो कस्बों को छोड़ बाकी क्षेत्र थोड़े-बहुत विकास को भी तरस रहा है।