पूनिया ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर उठाए सवाल
वहीं करौली हिंसा को लेकर भाजपा गहलोत सरकार को घेरने में जुट गई है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने हिंसा के लिए गहलोत सरकार और प्रशासन को जिम्मेदार बताया है। पूनिया ने करौली की घटना को पूर्व नियोजित घटना बताया और सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।
कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ी-शेखावत
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी गहलोत सरकार पर जुबानी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ी हैं। करौली में शनिवार की घटना में चार पुलिस कर्मी भी घायल हुए हैं। जिसमें एक एसएचओ लेवल का अधिकारी भी शामिल है। पुलिस की सूचना के अनुसार एकाएक पथराव शुरू हुआ। मकान की छतों से पथराव शुरू हुआ। इतनी भारी मात्रा में घरों की छतों पर पत्थरों का होना पूरे मामले को संदेह के घेरे मे लाता है। अगर एसी कोई आशंका थी तो प्रशासन द्वारा परमिशन क्यों दी गई, ये बड़ा सवाल है।
उपद्रव काला दिन में दर्ज
शेखावत ने कहा कि क्या पुलिस और प्रशासन को पत्थरों के एकत्र करने की कोई जानकारी नहीं थी। अगर नहीं थी तो पुलिस के नेटवर्क को दुरुस्त करने की अवश्यकता है। रैली का रूट तय किया गया होगा। फिर रूट में पुलिस बल तैनात क्यों नहीं था। पुलिस इंटेलिजेंस को कोई सूचना नहीं थी, ये सवाल अभी खड़े हैं, जो कि जांच में ही समाने आएगा कि क्या और क्यों हुआ। करौली का कल का उपद्रव इतिहास में काला दिन के रूप में दर्ज हो गया है।
राजे ने की तुरंत एक्शन लेने की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी करौली हिंसा की कड़ी निंदा की है। राजे ने ट्वीट कर लिखा कि करौली में नव संवत्सर के अवसर पर निकाली जा रही उत्साह रैली से पूर्व यदि प्रशासन सतर्कता बरतता तो हमले की यह घटना टल सकती थी। प्रशासन की उदासीनता के कारण भी सौहार्द का माहौल खराब हुआ। राज्य सरकार तुरंत एक्शन लें। उन्होंने कहा कि शांति प्रिय राजस्थान में नफरती मानसिकता को नहीं पनपने दिया जा सकता। प्रशासन को दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।